श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत; काशी विश्वनाथ धाम में अब नहीं सताएगी गर्मी, जर्मन हैंगर तकनीक से लगाए जाएंगे पंडाल
वाराणसी: मार्च के महीने में गर्मी अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है. गर्मी की प्रचंडता को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं. पूरे धाम क्षेत्र में जर्मन हैंगर तकनीक से टेंट लगाया जा रहा है. इसके अलावा गर्मी से राहत के लिए पानी के फव्वारे (मिस्ट फैन) वाले फैन भी धाम क्षेत्र में लगाएं जाएंगे.
श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट तीर्थ क्षेत्र के एसडीएम ने बताया कि गर्मी के मौसम की शुरुआत हो गई है. ऐसे में धूप की तीखी किरणों के कारण धाम में लगे पत्थर तपने लगे हैं. ऐसे में श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ के दर्शन में कोई दिक्कत न हो इसके लिए पूरे धाम क्षेत्र में जर्मन हैंगर तकनीक से पंडाल लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा जमीन पर जूट की मोटी मैट भी बिछाई गई है.
भक्तों के लिए ये भी इंतजाम
काशी विश्वनाथ के गंगा द्वार से गर्भगृह तक यह व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही धाम क्षेत्र में मिस्ट फैन भी लगाए जाएंगे, जो यहां आने वाले भक्तों पर पानी के फव्वारे बरसायेंगे जिससे श्रद्धालुओं को बाबा धाम में शीतलता मिल पाएगी. इन सब के अलावा धाम क्षेत्र में जगह जगह श्रद्धालुओं के लिए पेय जल की व्यवस्था की गई है. इतना ही नहीं ग्लूकोज और ओआरएस के घोल भी श्रद्धालुओं को निःशुल्क दिया जा रहा है.
श्रद्धालुओं में खुशी
काशी विश्वनाथ मंदिर में इन व्यवस्थाओं से यहां आने वाले श्रद्धालु भी काफी गदगद हैं. श्रद्धालुओं की मानें तो वो धाम की व्यवस्था से पूरे तरह से खुश हैं और उन्हें भी बाबा धाम में खुद के वीआईपी होने का अहसास हो रहा है.
पेपर लीक माफियाओं पर सरकार का बड़ा प्रहार, डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेश करेंगे नया विधेयक
ई-बसों की शुरुआत फिर टली, भोपाल में नई तारीख का इंतजार
विश्वनाथ धाम की हाईटेक सुरक्षा! AI, 2575 कैमरे और ड्रोन से संदिग्धों पर रहेगी नजर
मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं की बस दुर्घटनाग्रस्त, हिमाचल में दो की गई जान
राजस्थान में बारिश की वापसी, 10 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी
यूपी में मानसून हुआ सक्रिय, उत्तर की ओर खिसके ट्रफ से कई जिलों में भारी बारिश के संकेत
लाड़ली बहनों का इंतजार खत्म कब होगा? 39वीं किस्त की संभावित तारीख जानें
रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! निशातपुरा स्टेशन को मिला दो प्रमुख ट्रेनों का ठहराव