एमपी रोडवेज 22 साल बाद जिंदा, मोहन सरकार लॉन्च करेगी हर रुट पर चमचमाती बसें
भोपाल: मध्यप्रदेश में 22 साल बाद सड़कों पर नए स्वरूप में राज्य परिवहन की बसें दौड़ेंगी. मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नई परिवहन सेवा शुरू करने के निर्णय को हरी झंडी दे दी गई. इसके तहत प्रदेश के सभी शहरों में पीपीपी मोड पर बसों का संचालन किया जाएगा. नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा "नई परिवहन सेवा के तहत यात्रियों को मौजूदा बस किराए से सस्ते में सरकार सफर कराएगी."
सरकार नहीं खरीदेगी बसें, कंपनियां बनाएगी
राज्य मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर निर्णय लिया गया. बैठक में प्रदेश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कैबिनेट में हुए इस निर्णयों को लेकर बताया "सरकार ने तय किया है कि इसके तहत सरकार खुद बसें खरीदकर उसका संचालन नहीं कराएगी, बल्कि बस ऑपरेटर कंपनियां बनाकर प्रदेश भर में बसों का संचालन कराया जाएगा. यानी पीपीपी मॉडल पर बसें चलाई जाएंगी."
निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनेगा
मध्यप्रदेश में चलने वाली बसों की निगरानी के लिए प्रदेश स्तर पर एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा. इसमें बसों की जीपीएस के माध्यम से लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी. बसों में टिकट वसूली के नाम पर होने वाली चोरी को रोकने के लिए टिकट काटने के लिए एक अलग एजेंसी बनाई जाएगी. इससे टिकट चोरी के नाम पर होने वाले नुकसान को खत्म किया जाएगा. नई व्यवस्था में बसों को कार्गो सिस्टम के आधार पर चलाया जाएगा. इसके लिए परिवहन नीति में संशोधन किया जाएगा. नए सिस्टम में बसों पर पार्सल और सामान को एक शहर से दूसरे शहर तक भेजा जा सकेगा. इससे बसों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जाएगा.
बसों का किराया भी होगा कम
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया "सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर जैसे बड़े शहरों से की जा रही है, जहां पहले से नगर बस सेवा चल रही हैं. इसके बाद सेवा को धीरे-धीरे सभी शहरों तक चलाया जाएगा. इन बसों में मौजूदा बसों से किराया कम होगा. इस नई व्यवस्था से ग्रामीण इलाकों तक आवागमन सुलभ होगा."
प्रदेश में बनाई जाएंगी 7 होल्डिंग कंपनियां
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेश में 7 होल्डिंग कंपनियां बनाई जाएंगी. कैबिनेट ने इसके लिए पहली कंपनी के गठन के लिए 101 करोड़ की राशि का प्रावधान भी कर दिया है. इस सेवा की 3 स्तरीय मॉनिटरिंग की जाएगी. प्रदेश स्तर पर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और रीवा में 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएंगी. इसके अलावा सभी जिलों में जिला स्तरीय परिवहन समिति गठित की जाएंगी, जिसमें प्रभारी मंत्री या फिर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन होगा. ये समितियां यात्री परिवहन को बेहतर बनाने के लिए सलाह और रूट चार्ज तैयान करने में समन्वय करेंगी.
नो प्रॉफिट, नो लॉस के आधार पर बस सेवा
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया "सरकार की योजना इस यात्री परिवहन सेवा से फायदा कमाना नहीं है, बल्कि सेवा देना है. सरकार इसे नो प्रॉफिट, नो लॉस पर चलाएगी. सरकार की कोशिश रहेगी कि बसें बेहतर चलें और कंपनियां घाटे में न जाएं." कैबिनेट की बैठक में इसका प्रजेंटेशन दिया गया. इसमें कई मंत्रियों ने सुझाव दिए हैं, नियम बनाते समय इसमें नियमों को जोड़ा जाएगा.
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