परिवहन विभाग घोटाले में सौरभ शर्मा को मिली जमानत, लोकायुक्त पेश नहीं कर पाई चालान
भोपाल: मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित परिवहन घोटाले में लोकायुक्त ने 60 दिन बाद भी चालान पेश नहीं कर पाई है, जिसके चलते सौरभ शर्मा और उसके साथियों को भोपाल सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है. जमानत मिलने के बाद भी सभी जेल में ही रहेंगे.
जांच ऐजेंसियों के हाथ खाली!
इस मामले की जांच तीन-तीन ऐजेंसियां कर रही हैं लेकिन अभी तक सभी एजेंसियों के हाथ लगभग खाली हैं. सौरभ शर्मा, चेतन सिंह और शरद जायसवाल के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी राजधानी भोपाल में मिली एक इनोवा गाड़ी थी. इसमें 52 किलो सोना और करोड़ों रुपए कैश बरामद हुआ था. जांच एजेंसियों की लगातार पूछताछ के बाद भी अब तक यह खुलासा नहीं हो पाया है कि यह सोना और कैश किसका था.
60 दिन में लोकायुक्त पेश नहीं कर पाई चालान
परिवहन घोटाले के आरोप में जेल में बंद सौरभ शर्मा, चेतन सिंह और शरद जायसवाल को भोपाल सेशन कोर्ट ने जमानत दे दी है. इस जमानत को देने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि भोपाल लोकायुक्त पुलिस जो कि इस पूरे मामले की पहली जांच एजेंसी थी, जिसने सबसे पहले सौरभ शर्मा के ठिकाने पर कार्रवाई की थी. लोकायुक्त को 60 दिनों में कोर्ट में चालान पेश करना था लेकिन वह अब तक चालान पेश नहीं कर सकी और सेशन कोर्ट ने जमानत दे दी.
'लोकायुक्त ने अपना पक्ष नहीं रखा'
भोपाल लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश राम प्रकाश मिश्रा ने हैरानी जताई है क्योंकि इस मामले में दिया गया समय पर्याप्त था. लोकायुक्त समय पर अपना पक्ष रख सकता था और लोकायुक्त द्वारा जब इस पूरे मामले में अपना पक्ष समय पर नहीं रखा. सौरभ शर्मा, चेतन सिंह और शरद जायसवाल के वकीलों ने इसका लाभ लेते हुए भोपाल सेशन कोर्ट में अप्लाई किया. जिसकी सुनवाई के दौरान लोकायुक्त के द्वारा समय पर चालान प्रस्तुत न करने के कारण इन तीनों को जमानत दे दी गई.
जमानत मिलने के बाद भी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे
सेशन कोर्ट द्वारा दी गई जमानत के बाद भी अभी यह तीनों जेल में ही रहेंगे क्योंकि इस पूरे मामले में ईडी स्पेशल कोर्ट भोपाल ने भी तीनों के खिलाफ मामला पंजीबद्ध किया है. जिसकी अलग से प्रक्रिया प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही है. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा स्पेशल कोर्ट में सबूत प्रस्तुत किए जाएंगे. भोपाल सेंट्रल जेल में रहते हुए भी प्रवर्तन निदेशालय की टीम में इन तीनों से और आयकर विभाग की टीम ने इनसे लगातार पूछताछ की थी.
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष ने उठाए थे सवाल
मध्य प्रदेश विधानसभा में सौरभ शर्मा और उसके साथियों चेतन सिंह और शरद जायसवाल के केस को लेकर जमकर हंगामा हुआ था. विपक्ष ने इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों को घेरा वहीं मध्य प्रदेश सरकार का कहना था की जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं. इस बीच कांग्रेस की तरफ से इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ही जमानत मिल गई.
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