चीन का भारत के पड़ोसियों पर बढ़ता प्रभाव, फिर भी कूटनीति में भारत की जीत
चीन भारत के पड़ोसियों पर नजर बनाकर रखता है. नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका को वो अपने पाले में करने में जुटा रहता है. उसकी कोशिश होती है कि इन देशों के माध्यम से वो एशिया में अपना प्रभाव जमा सके. लेकिन भारत की कूटनीति के आगे उसकी एक नहीं चलती है और यही वजह है कि इन मुल्कों का प्रेम उसके (भारत) प्रति कम नहीं हुआ है.
एक ओर जहां बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पीएम मोदी से मुलाकात करने के लिए बेताब हैं तो वहीं श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पीएम मोदी को अपने देश बुलाया है. दिसानायके का ये न्योता चीन के लिए झटका है, क्योंकि जिनपिंग मानते हैं कि दिसानायके उनके पाले में हैं.
दो दिन श्रीलंका में रहेंगे पीएम मोदी
श्रीलंकाई राष्ट्रपति के न्योते को पीएम मोदी ने स्वीकार भी किया. वह 4 अप्रैल से 6 अप्रैल तक श्रीलंका में रहेंगे. थाइलैंड में BIMSTEC समिट में हिस्सा लेने के बाद वह श्रीलंका जाएंगे. पीएम 4 तारीख को देर शाम श्रीलंका पहुंचेंगे. पीएम मोदी के स्वागत के लिए श्रीलंका ने पूरी तैयारी कर ली है.
5 अप्रैल को श्रीलंका के राष्ट्रपति और पीएम मोदी की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसके बाद आठ समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. दिसानायके प्रधानमंत्री मोदी को मित्र विभूषण सम्मान प्रदान करेंगे. इस उपाधि की शुरुआत 2008 में की गई थी और यह उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को दी जाती है जिनके साथ श्रीलंका के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं.
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. 5 अप्रैल की शाम को राष्ट्रपति के आवास पर भोज का आयोजन किया जाएगा. अगली सुबह यानी 6 अप्रैल को पीएम मोदी अनुराधापुरा जाएंगे. प्रधानमंत्री मोदी वहां से रामेश्वरम के लिए रवाना होंगे.
चीन को जलाने वाला कदम
पीएम मोदी की इस यात्रा को श्रीलंका पर चीन के बढ़ते प्रभाव और उसका मुकाबला करने के लिए नई दिल्ली द्वारा उठाए गए एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है. इसकी शुरुआत पिछले साल दिसंबर में हुई थी. तब राष्ट्रपति दिसानायके भारत दौरे पर आए थे.
पद पर बैठने के बाद उनकी ये पहली विदेश यात्रा थी. यही नहीं दिसानायके के राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम मोदी श्रीलंका जाने वाले पहले विदेशी नेता होंगे. दिसानायके पिछले साल सितंबर में राष्टपति बने थे.
जनवरी में चीन गए थे श्रीलंका के राष्ट्रपति
दिसंबर में भारत आने के बाद दिसानायके जनवरी, 2025 में चीन के दौरे पर गए थे. यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इस दौरान चीन और श्रीलंका ने अधिक निवेश और आर्थिक सहयोग पर सहमति व्यक्त की, जिसमें हंबनटोटा में एक तेल रिफाइनरी स्थापित करने के लिए सिनोपेक के साथ 3.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सौदा भी शामिल था.
दोनों पक्षों ने 15 सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. इन समझौते के बाद भी भारत की ओर से पूरी कोशिश रही है कि श्रीलंका नेपाल के पाले में ना जाए. भारत ने हाल ही में अपने पड़ोसी को 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का पैकेज दिया.
पीएम मोदी ने रेलवे सिग्नल सिस्टम के पुनर्वास, श्रीलंकाई विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और अगले पांच वर्षों में 1,500 सिविल सर्वेंट की ट्रेनिंग जैसी पहलों की घोषणा की. उन्होंने दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए रामेश्वरम (तमिलनाडु) और तलाईमन्नार (श्रीलंका) के बीच नौका सेवा की भी घोषणा की.
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