ओरण-भूमि संरक्षण हेतु राज्य समिति को स्वीकृति: पारंपरिक धरोहर को संजीवनी
प्रदेश में ओरण (देवबन) भूमि के संरक्षण, सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कमेटी को मंजूरी दे दी है। आज सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि हमने राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जितेन्द्र राय गोयल को कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित सभी सदस्यों के नामों को स्वीकृति प्रदान की है। इस पर कोर्ट ने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार के खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को वापस ले लिया। अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 18 दिसंबर 2024 के आदेश में पवित्र देवबन-ओरण के संरक्षण के लिए एक संयुक्त समिति के गठन का निर्देश दिया था। इसकी पालना में राज्य सरकार ने 9 जनवरी 2025 को शपथ पत्र पेश करके कहा कि राज्य ने अपने सदस्यों का नामांकन कर दिया है और समिति के अध्यक्ष के लिए प्रस्ताव पर्यावरण मंत्रालय को भेज दिया गया है।
पर्यावरण मंत्रालय ने की देरी
लेकिन इसके बाद भी पर्यावरण मंत्रालय ने कमेटी का गठन नहीं किया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी और 16 अप्रैल को पारित आदेशों के बावजूद मंत्रालय ने अपने प्रतिनिधि का नामांकन नहीं किया और न ही समिति के गठन को अंतिम रूप दिया। जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार को अवमानना का नोटिस जारी किया। आज सुनवाई के दौरान तन्मय कुमार कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने निर्देशों की पालना का शपथ पत्र पेश किया।
क्या होती है ओरण भूमि?
दरअसल, लोकदेवता और मंदिरों के आसपास की वह भूमि जिसे सालों से जीव-जन्तु, वन्यजीव, पशुओं के विचरण और चरने के लिए छोड़ा जाता रहा है। उसे देवबन अथवा ओरण भूमि कहा जाता है। इससे लोगों की आस्था भी जुड़ी होती है। ओरण में पेड़ की एक डाल भी तोड़ने पर पाबंदी होती है। लेकिन पिछले कुछ सालों से देशभर में ओरण भूमि को लेकर विवाद सामने आए हैं।
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