राज और उद्धव पर भड़के फडणवीस- शिंदे बोले ये सिर्फ सत्ता की लालसा के अलाव कुछ नहीं
मुंबई। भाजपा और महायुति गठबंधन के नेताओं ने इसे सियासी मजबूरी और भाईचारे की नौटंकी करार दिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के भाषण पर कटाक्ष करते हुए कहा, राज ने जहां मराठी भाषा के प्रति संवेदनशीलता दिखाई, वहीं उद्धव का पूरा भाषण ईर्ष्या, कटुता और सत्ता की लालसा से भरा था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज ठाकरे पर व्यंग्य करते हुए कहा, अगर मैंने ठाकरे भाइयों को मिला दिया तो शायद बालासाहेब की भी मुझ पर कृपा है। उन्होंने रैली को “रुदाली कार्यक्रम” बताया और कहा कि मराठी का नाम लेकर सत्ता की राजनीति की जा रही है। फडणवीस ने यह भी पूछा, 25 साल मुंबई नगर निगम आपके पास थी, आपने मराठी के लिए कौन सा कार्य किया? वहीं शिंदे ने कहा कि यह रैली मराठी मानुष की आवाज बनने के बजाय, सत्ता प्राप्ति की व्यक्तिगत कोशिश बन गई। उन्होंने उद्धव पर 2019 में भाजपा से नाता तोड़कर मराठी अस्मिता और बालासाहेब की विचारधारा के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। राज्य मंत्री आशीष शेलार ने तो इसे भाई-भाई के मेल की रैली बताते हुए कहा, यह मराठी भाषा के प्रेम के लिए नहीं, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) की सियासी जमीन बचाने का प्रयास था। वहीं, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, मराठी से प्रेम होना ठीक है, लेकिन हिंदी-विरोधी भावना गलत है। मारपीट और धमकी देकर कोई भाषा नहीं सिखाई जा सकती।
शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस की यह एकजुटता बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है। उद्धव की पार्टी जहां लोकसभा में पिछड़ती दिखी, वहीं एमएनएस हालिया विधानसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई। यह मंच साझा करना न केवल बालासाहेब ठाकरे की विरासत को फिर से एकजुट करने की कोशिश है, बल्कि मराठी मतदाताओं के बीच भाजपा के खिलाफ एक भावनात्मक और सांस्कृतिक मोर्चा खड़ा करने की रणनीति भी लगती है।
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