PHE विभाग में 27 करोड़ का घोटाला उजागर, प्रभारी कार्यपालन यंत्री सस्पेंड
मुरैना। मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी यानि पीएचई विभाग में ई-टेंडर घोटाला सामने आया है, जिसमें मुरैना के प्रभारी कार्यपालन यंत्री पर आरोप है कि उन्होंने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए निविदा दरों में हेराफेरी की गई। इससे शासन को आर्थिक हानि हुई है। मामला संज्ञान में आने के बाद उच्च अधिकारियों ने संबंधित प्रभारी कार्यपालन यंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि में इनका मुख्यालय, मुख्य अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ग्वालियर रहेगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुरैना खंड में पदस्थ रहे प्रभारी कार्यपालन यंत्री एसएल बाथम पर आरोप है कि ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए निविदा दरों में हेरफेर की गई थी। इसकी शिकायत होने पर शासन ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच में सामने आया है कि न्यूनतम दर डालने वाले निविदाकार को दरकिनार कर प्रभारी कार्यपालन यंत्री एसएल बाथम ने ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर निविदा दरों में हेरफेर की थी।इस मामले में मध्य प्रदेश सिविलि सेवा नियम 1966 के अंतर्गत एसएस बाथम को सस्पेंड कर दिया गया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने मुरैना जिले में पहाड़गंज के टिकटोली टूमदार गांव में रेट्रोफिटिंग योजना में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 346 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था। इसकी निविदा 11 अप्रैल को खंड स्तर पर प्रभारी कार्यपालन यंत्री संतोषी लाल बाथम द्वारा खोली गई थी। इसमें तीन लोगों ने निविदा भरी थी। इसमें डंडोदिया कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 16.11 प्रतिशत, मंगलदास बोरवेल ने 18.11 प्रतिशत और दीनदयान तिवारी ने 17.50 प्रतिशत एसओआर भरी थी। इसमें सबसे कम एसओआर मंगलदास बोरवेल की थी, लेकिन प्रभारी कार्यपालन यंत्री ने दीनदयाल की निविदा को बढ़ाकर 19.49 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही दीनदयाल से अनुबंध करते हुए कार्य आदेश भी जारी कर दिया।
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