राजस्थान-एमपी की सीमा पर बने चंबल-पाली पुल पर भारी वाहनों का प्रवेश बंद, तय करना पड़ेगा 50 किमी लंबा रूट
सवाईमाधोपुर। पिछले दिनों भारी बारिश के चलते सवाईमाधोपुर-श्योपुर मार्ग पर चंबल नदी के पाली पुल के दोनों ओर एप्रोच स्लेब क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके चलते श्योपुर जिला कलक्टर ने यहां मरम्मत कार्य को लेकर फिलहाल भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई है। ऐसे में अब वाहन चालाकों 50 किमी लंबा रूट तय करना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार राजस्थान रोड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन की ओर से चंबल के पाली पुल का निर्माण कराया गया और वर्ष 1995 में ये बनकर तैयार हुआ, जिसका शुभारंभ वर्ष 1996 में मप्र-राजस्थान के मुयमंत्रियों ने सामूहिक रूप किया था।
बता दें कि पिछले दिनों कोटा, सवाईमाधोपुर सहित कई जिलों में बारिश हुई थी। जिसके चलते कई जगह बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे और नदी-नाले उफान पर आ गए थे। भारी बारिश के चलते चंबल-पाली पुल की एप्रोच स्लैब करीब 30 साल बाद क्षतिग्रस्त हो गई है। अब मरम्मत होने तक श्योपुर जिला कलक्टर अर्पित वर्मा ने यहां से भारी वाहनों के आवागमन पर लिए रोक लगाई है।
अब इटावा-लाखेरी होकर होगा सफर
चंबल पाली पुल से छोटे चार पहिया वाहन और दो पहिया वाहन तो निकल रहे हैं, लेकिन भारी वाहनों (लोडिंग वाहन, ट्रक, डंपर आदि) और यात्री बसों को अब राजस्थान के खातोली, इटावा, गैंता, माखीदा, लाखेरी, इंदरगढ़ होते सवाईमाधोपुर जाना पड़ रहा है। इसमें 50 किलोमीटर से अधिक का लंबा फेर लगा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्योपुर-सवाईमाधोपुर और श्योपुर-जयपुर के बीच प्रतिदिन 25 से अधिक यात्री बसों का संचालन होता है, जिनका आवागमन फिलहाल बंद है।
'सिर्फ गुस्सा नहीं, ठोस कदम जरूरी', शिक्षा मंत्री ने राहुल पर साधा निशाना
निशातपुरा स्टेशन तैयार, 26 जुलाई से तीन ट्रेनों के साथ शुरू होगी नई यात्रा
CJP हिंसा पर सख्त कार्रवाई, उपद्रवियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की नौ FIR
मध्य प्रदेश में जीवनरक्षक कानून लागू, शहर-गांव के लिए तय हुई गोल्डन टाइम सीमा
48 घंटे में बदला छात्र आंदोलन का पूरा घटनाक्रम, CJP प्रदर्शन बना सियासी मुद्दा
इंदौर में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, टंट्याभील चौराहे पर NEET पेपर लीक के खिलाफ जुटी भीड़