निराकार से साकार रूप के दर्शन कर भाव-विभोर हुए संजय दत्त
बाबा महाकाल के मंदिर आकर ऐसा लगता है कि यहां एक बहुत बड़ी शक्ति है और यह मेरा सौभाग्य है कि बाबा ने मुझे यहां बुलाया है। भस्म आरती में जो एहसास हुआ, उसके बारे में मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं। जब बाबा महाकाल बुलाएंगे तब फिर से आऊंगा। यह बात बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद अभिनेता संजय दत्त ने मीडिया से कही। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से मंदिर आने की कोशिश कर रहा था, आज बाबा का बुलावा आया और मैं यहां आ गया।
महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि प्रसिद्ध अभिनेता संजय दत्त आज बाबा महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुंचे थे, जहां वह पूरी तरह से बाबा महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए। उन्होंने भगवा रंग के धोती कुर्ते पहन रखे थे और मंदिर में आते ही वह पूर्ण सादगी के साथ माथे पर जय महाकाल का तिलक लगाकर भस्म आरती में शामिल हुए। नंदी हॉल में बैठकर संजय दत्त ने बाबा महाकाल की भस्म आरती देखी। भस्म आरती में बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप को देखकर अभीभूत हो गए। इस दौरान कभी संजय दत्त हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का ध्यान करते दिखाई दिए तो कभी तालियां बजाकर भक्ति करते देखे गए।
सादगी से किए दर्शन
संजय दत्त यहां पूर्ण सादगी के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए। मंदिर पहुंच मार्ग पर उन्होंने एक छोटी बच्ची से माथे पर जय श्री महाकाल का तिलक लगवाया और तो और कुछ देर उससे बात भी की। नंदी हॉल में भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के प्रत्येक शृंगार को निहारते रहे और इसके बारे में उन्होंने पंडित यश गुरु से भी पूछा। पंडित यश गुरु ने भस्म आरती से संबंधित संजय दत्त की सभी जिज्ञासाओं को शांत किया और इस मंदिर के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई कि यहां प्रतिदिन सुबह बाबा महाकाल को भस्म क्यों चढ़ाई जाती है। याद रहे कि संजय दत्त बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं, जो कि कई वर्षों से श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने तो आना चाहते थे, लेकिन किसी कारण से यहां नहीं आ पा रहे थे। आज उनकी मनोकामना पूर्ण हुई और उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन किए।
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