जिला रैंकिंग से मजबूत हो रही स्कूल शिक्षा में जवाबदेही और सुधार प्रक्रिया
जयपुर, 9 फरवरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। यह रैंकिंग प्रदेश के समस्त जिलों के शैक्षणिक परिणामों, विद्यालयों के दैनिक संचालन और गवर्नेंस आदि संकेतकों में प्रदर्शन के आकलन के आधार पर जारी की जाती है। ताज़ा रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे हैं, जबकि चूरू ने सराहनीय प्रयास करते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है।
रैंकिंग में छात्रों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता, फील्ड विजिट के माध्यम से निगरानी और शैक्षणिक मूल्यांकन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। सीखने के परिणामों पर बढ़ते जोर और उच्च स्तर पर नियमित प्रदर्शन समीक्षाओं के साथ, जिला रैंकिंग स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही, लक्षित सहयोग और निरंतर सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।
सीखने के परिणामों को विशेष महत्व
इस वर्ष शैक्षणिक सीखने के परिणामों को औपचारिक रूप से रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है। कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (सीबीए), ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ओआरएफ) असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नतीजों को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि जिलों का प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि शैक्षणिक प्रभाव को भी दर्शा सके।
डेटा-आधारित होती है समीक्षा:
एकेडमिक रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन की नियमित, डेटा-आधारित समीक्षा करना और स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत बनाना है। जिला रैंकिंग और पैरामीटर-वाइज़ स्कोर की हर माह स्कूल शिक्षा विभाग (सीएसई) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की जाती है, जिसमें कमियों की पहचान कर सुधार के लिए स्पष्ट अगले कदम तय किए जाते हैं। ताजा रैंकिंग के अनुसार झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। तीसरे पायदान पर चूरू रहा, जिसने गंगानगर को पीछे छोड़ा। सीकर , भरतपुर और खैरतल-तिजारा क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। बांसवाड़ा और जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर हैं।
रैंकिंग प्रणाली ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है- शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जिला रैंकिंग ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। सीखने के परिणामों को रैंकिंग से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सभी जिलों को समान अवसर, समयबद्ध सहयोग और आवश्यक संसाधन मिलें, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।
विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने कहा कि डेटा-आधारित समीक्षा और सीखने के परिणामों पर फोकस से अब स्कूल शिक्षा प्रणाली में ठोस और स्थायी सुधार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों के जरिए हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।
जयपुर, 9 फरवरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। यह रैंकिंग प्रदेश के समस्त जिलों के शैक्षणिक परिणामों, विद्यालयों के दैनिक संचालन और गवर्नेंस आदि संकेतकों में प्रदर्शन के आकलन के आधार पर जारी की जाती है। ताज़ा रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे हैं, जबकि चूरू ने सराहनीय प्रयास करते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है।
रैंकिंग में छात्रों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता, फील्ड विजिट के माध्यम से निगरानी और शैक्षणिक मूल्यांकन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। सीखने के परिणामों पर बढ़ते जोर और उच्च स्तर पर नियमित प्रदर्शन समीक्षाओं के साथ, जिला रैंकिंग स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही, लक्षित सहयोग और निरंतर सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।
सीखने के परिणामों को विशेष महत्व
इस वर्ष शैक्षणिक सीखने के परिणामों को औपचारिक रूप से रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है। कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (सीबीए), ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ओआरएफ) असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नतीजों को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि जिलों का प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि शैक्षणिक प्रभाव को भी दर्शा सके।
डेटा-आधारित होती है समीक्षा:
एकेडमिक रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन की नियमित, डेटा-आधारित समीक्षा करना और स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत बनाना है। जिला रैंकिंग और पैरामीटर-वाइज़ स्कोर की हर माह स्कूल शिक्षा विभाग (सीएसई) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की जाती है, जिसमें कमियों की पहचान कर सुधार के लिए स्पष्ट अगले कदम तय किए जाते हैं। ताजा रैंकिंग के अनुसार झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। तीसरे पायदान पर चूरू रहा, जिसने गंगानगर को पीछे छोड़ा। सीकर , भरतपुर और खैरतल-तिजारा क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। बांसवाड़ा और जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर हैं।
रैंकिंग प्रणाली ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है- शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जिला रैंकिंग ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। सीखने के परिणामों को रैंकिंग से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सभी जिलों को समान अवसर, समयबद्ध सहयोग और आवश्यक संसाधन मिलें, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।
विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने कहा कि डेटा-आधारित समीक्षा और सीखने के परिणामों पर फोकस से अब स्कूल शिक्षा प्रणाली में ठोस और स्थायी सुधार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों के जरिए हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।
असम में बाढ़ का कहर, 50 लोगों की मौत; 40 अब भी लापता, हालात बेहद गंभीर
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, इराक में धमाके और वेस्ट बैंक में खूनी संघर्ष
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, सरकार से बातचीत कल फिर होगी
जेपी अस्पताल में हंगामा, 21 कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बाद आत्मदाह की चेतावनी
विवाहित बेटियों के हक में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अनुकंपा नियुक्ति से नहीं किया जा सकता वंचित
चीन-फिलीपींस समुद्री विवाद फिर सुर्खियों में, वॉटर कैनन घटना पर दुनिया की नजर
भारत स्काउट्स-गाइड्स के निपुण टेस्टिंग कैंप का शुभारंभ, प्रतिभागियों में उत्साह
दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवा पर रोक और 17 मेट्रो स्टेशन बंद
राहुल के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की अपील