400 साल पुराने इस मंदिर नंदी के मुख से निकलती है जलधारा,
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी को है. महाशिवरात्रि के मौके पर आज हम आपको शिवजी के ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां निरंतर जल की धारा बहती है. यह धारा कहां से आ रही है, आज तक किसी को नहीं पता. आइए महाशिवरात्रि के मौके पर जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में...
15 फरवरी को देशभर में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाने वाला है, हर वर्ष फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर भगवान शिव निराकार स्वरूप से साकार स्वरूप में प्रकट हुए थे. इस शुभ दिन पर भक्त शिव मंदिर में दर्शन कर मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेंगलुरू में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिवलिंग पर निरंतर जल धारा बहती है. चौंकाने वाली बात ये है कि जल का स्त्रोत अज्ञात है. शोध करने आए वैज्ञानिक भी नहीं जानते हैं कि पानी कहां से आ रहा है.
बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में भगवान शिव का प्राचीन काडु मल्लेश्वर मंदिर स्थापित है, जिसकी तुलना 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से की जाती है. माना जाता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग मल्लिकार्जुन का स्वरूप है. मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी के दौरान मराठा राजा शिवाजी के भाई वेंकोजी ने कराया था. मंदिर पर मराठा और द्रविड़ शैली की नक्काशी और बनावट हर हिस्से में देखने को मिलती है. मंदिर को 400 साल पुराना बताया जाता है और इसी मंदिर के पास स्थित है श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र.
माना जाता है कि काडु मल्लेश्वर मंदिर का लाभ तभी मिलता है, जब दक्षिणामुख नंदी तीर्थ के दर्शन हो जाते हैं. दक्षिणामुख नंदी तीर्थ क्षेत्र में भक्तों को आंखों से चमत्कार और अपने भगवान के प्रति भक्त की आस्था देखने को मिलती है. मंदिर के प्रांगण में नंदी महाराज की प्राचीन पत्थर से बनी प्रतिमा मौजूद है, जिसके मुख से निरंतर साफ और ठंडे पानी की जलधारा निकलती रहती है, जो सीधे शिवलिंग पर गिरती है.
पानी कहां से आता है? मुख्य उद्गम पता लगाने के लिए वैज्ञानिक भी मंदिर का रुख कर चुके हैं, लेकिन किसी को नहीं पता कि पानी आता कहां से है. जलधारा सिर्फ नंदी महाराज के मुख से निकलती है और शिवलिंग का जलाभिषेक करती है. भक्त इसे भक्ति और चमत्कार मानते हैं. स्थानीय मान्यता है कि मंदिर में विराजमान शिवलिंग भक्तों की हर इच्छा को पूरी करते हैं. अगर भक्त अपने ईष्ट से सच्चे मन से कुछ भी मांगता है, वह पूरा हो जाता है.
महाशिवरात्रि और सावन के महीने में लाखों की भीड़ मंदिर पहुंचती है. महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर में 15 दिन का मूंगफली मेला भी लगता है. इतना ही नहीं, महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर को फूलों से सजाकर भगवान शिव की रथ यात्रा भी निकाली जाती है और विशेष अभिषेक भी होता है.
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