तीसरे विश्व युद्ध में हो सकता है 12 हजार न्यूक्लियर मिसाइलों का उपयोग
वॉशिंगटन । तीसरे विश्व युद्ध के दौरान यदि दुनिया भर की करीब 12,000 न्यूक्लियर मिसाइलों का उपयोग होता है, तो अनुमानित 5 अरब लोग मारे जाएंगे और पूरी पृथ्वी ‘न्यूक्लियर विंटर’ यानी परमाणु शीत की चपेट में आ जाएगी। इस स्थिति में दस साल तक दुनिया के बड़े हिस्सों में बर्फबारी और अत्यधिक ठंड बनी रहेगी।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों और हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, इस भीषण परिदृश्य में केवल दो देश – ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड – ही जीवित रहने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन देशों की भौगोलिक स्थिति उन्हें परमाणु शीत की मार के बावजूद कृषि और जीवन बनाए रखने में मदद करेगी।
एनी जैकबसन, जो ‘न्यूक्लियर वॉर: ए सिनेरियो’ की लेखिका और आर्मगेडन विशेषज्ञ हैं, ने चेतावनी दी कि परमाणु विस्फोटों से निकलने वाली आग 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती धमाकों में करोड़ों लोग मारे जाएंगे, लेकिन असली तबाही उसके बाद शुरू होगी। कृषि प्रधान क्षेत्रों जैसे आयोवा और यूक्रेन में दस साल तक बर्फ और ठंड की वजह से खेती पूरी तरह विफल हो जाएगी, जिससे लोग भूख और हालात की मार से मरेंगे। जैकबसन ने कहा कि ओजोन परत को नुकसान और रेडिएशन की मौजूदगी स्थिति को और भयावह बना देगी।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लोग जीवित तो रहेंगे, लेकिन उन्हें अंधेरे में रहना होगा, भोजन के लिए संघर्ष करना होगा और रेडिएशन से बचने के लिए भूमिगत आश्रय लेना होगा। हालांकि इन देशों की समुद्र से दूरी और भौगोलिक स्थिति उन्हें तापमान में कटौती और कुछ हद तक सुरक्षित रहने में मदद करेगी। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और दोनों पक्षों से हमले और पलटवार हो रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार साल से युद्ध जारी है, जबकि अफगानिस्तान में तालिबान ने परमाणु संपन्न पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की धमकी दी है। इसके अलावा चीन और ताइवान के बीच भी तनाव बढ़ा हुआ है।
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