कौन हैं लेडी नागा किन्नर महामंडलेश्वर मां काली नंद गिरी? 70 खोपड़ियों के साथ क्यों घूमती हैं
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में किन्नर अखाड़े की एक बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में किन्नर अखाड़े ने पहली बार एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए किसी लेडी नागा किन्नर को महामंडलेश्वर बनाने का फैसला किया हैं. 27 वर्षीय मां काली नंद गिरी को किन्नर अखाड़े द्वारा महामंडेश्वर की उपाधि प्रदान की गई है. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच यह निर्णय साधु-संतों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन क्या आप जानते है कि मां काली नंद गिरी आखिर कौन हैं।
18 भषाओं का ज्ञान
27 वर्ष की मां काली नंद गिरी 18 भषाओं का ज्ञान हैं. इनता ही नहीं उन्होंने तंत्र साधना में भी महारथ हासिल कर रखी हैं. उन्हें 70 सिद्ध नरमुंड के साथ कार में भ्रमण करने और अघोरी परंपरा से जुड़ी जीवनशैली के लिए भी जाना जाता हैं. ये अपनी कार में साधना सामग्री लेकर चलती है. इन्हें कई बार चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर साधना करते हुए देखा गया हैं।
तंत्र साधना रात में ज्यादा प्रभावी-मां काली नंद गिरी
मां काली नंद गिरी ने बताया कि तंत्र साधना रात में ज्यादा प्रभावी होती है, इसलिए वे चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच साधना करती हैं. यह घटना किन्नर अखाड़े के इतिहास में नया अध्याय जोड़ रही है और साधना की दुनिया में कम उम्र की उपलब्धि का अनोखा उदाहरण पेश कर रही है।
बचपन से ही सन्यासी जीवन
मां काली नंद गिरी का सफर बचपन से ही सन्यास का रहा है. करीब 18 साल की तपस्या और 6 साल की तंत्र साधना के बाद वह किन्नर अखाड़े से जुड़ी. इसके बाद आचार्य डॉ. लक्ष्मीनारायण और सती नंद गिरी माता के मार्गदर्शन में उन्होंने यह उपाधि हासिल की है. मां काली नंद गिरी अक्सर काले वस्त्र, खुली जटाएं और नाक में नथ पहनकर घूमती हैं।
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