पाटनीपुरा-परदेशीपुरा: निगम की कार्रवाई से नाराज व्यापारी, आरोप- जबरन वसूली, बाजार ठप
इंदौर के पाटनीपुरा-परदेशीपुरा क्षेत्र में शनिवार शाम नगर निगम की चालानी कार्रवाई ने व्यापारियों के गुस्से को भड़का दिया। दरअसल शाम करीब 4 बजे नगर निगम का रिमूवल दल मोबाइल कोर्ट के साथ अतिक्रमण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई कर रहा था, तभी कुछ व्यापारियों ने इस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। वहीं देखते ही देखते यह विरोध एक बड़े और उग्र प्रदर्शन में बदल गया, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारी सड़क पर उतर आए और विरोध स्वरूप अपनी दुकानें बंद कर दीं।
वहीं इस दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि निगम के अमले को अपनी गाड़ियां छोड़कर मौके से पीछे हटना पड़ा। दरअसल व्यापारियों का आरोप है कि निगम कर्मचारी चालानी कार्रवाई के नाम पर लगातार क्षेत्र में पहुंचते हैं और दुकानों में जबरन घुसकर पैसे वसूलते हैं। उनके अनुसार, बिना किसी ठोस कारण या मामूली गलती पर भी मनमाने ढंग से भारी-भरकम चालान काटे जाते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि यह केवल नियम लागू करने की कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान करने और उनसे अवैध वसूली का तरीका बन गया है। इस कथित मनमानी के खिलाफ सभी व्यापारी एकजुट हुए और शनिवार को सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया है।
वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई
दरअसल प्रदर्शन के दौरान व्यापारी पाटनीपुरा और परदेशीपुरा की मुख्य सड़कों पर आ गए, जिससे पूरे क्षेत्र का यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचो-बीच खड़े होकर निगम के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। वहीं कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि निगम अमले के पास कोई विकल्प नहीं बचा। उन्हें अपनी कार्रवाई रोककर, अपनी गाड़ियां मौके पर ही छोड़कर सुरक्षा के लिए पीछे हटना पड़ा। व्यापारियों के आक्रोश को देखते हुए दल के सदस्य वहां से सुरक्षित निकलना चाहते थे।
पुलिस की टीम अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंची
वहीं सूचना मिलते ही परदेशीपुरा थाना पुलिस की टीम अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले यातायात बहाल करने और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने व्यापारियों को समझाने-बुझाने की कोशिश की कि वे सड़क जाम न करें और अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखें। हालांकि, व्यापारी अपने गुस्से में थे और उन्होंने अपनी चेतावनी दोहराई। व्यापारियों ने साफ कहा कि यदि चालानी कार्रवाई के नाम पर जारी अवैध वसूली और उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो वे भविष्य में और बड़ा और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों ने नगर निगम अधिकारियों पर सीधे तौर पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि निगम कर्मचारी चालान काटने से पहले या उसके बजाय पैसे की मांग करते हैं। यदि कोई व्यापारी पैसे देने से मना करता है, तो उसे मनमाने ढंग से बड़े चालान थमा दिए जाते हैं या फिर अन्य तरीकों से परेशान किया जाता है। कुछ व्यापारियों ने तो कैमरे के सामने यह भी आरोप लगाया कि निगम कर्मचारियों ने विरोध करने पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और मारपीट करने की कोशिश भी की। यह आरोप काफी गंभीर हैं और स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने इनकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, नगर निगम के रिमूवल दल के अधिकारियों ने व्यापारियों के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि वे केवल नियमों के अनुसार ही कार्रवाई कर रहे थे। अधिकारियों ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान व्यापारियों ने ही बाधा उत्पन्न की और टीम के साथ अभद्रता की। निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मोबाइल कोर्ट मौके पर ही नियमों के उल्लंघन पर चालान जारी कर रहा था और वसूली का कोई सवाल ही नहीं है। उनका यह भी कहना है कि विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और वे अपने काम से पीछे नहीं हटेंगे।
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