पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सियासी उतार-चढ़ाव की कहानी रही दिलचस्प
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब करीब है। चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना है। वहीं वोटों की गिनती 4 मई को होगी। इस विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल टीएमसी और बीजेपी के बीच है। वहीं राज्य में अन्य पार्टियां इस तीव्र मुकाबले के कारण हाशिए पर हैं। बीजेपी की स्थापना साल 1980 में हुई थी। यह भारत की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है। साल 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना पूर्व केंद्रीय मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सियासी रूप से उतार-चढ़ाव की कहानी काफी दिलचस्प है।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य के 42 सीटों में से 18 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन साल 2021 के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त माहौल बनाने के बाद भी बीजेपी टीएमसी से हरा गई, जिसके बाद से राज्य की सियासी कहानी फिर बदल गई और राज्य में बीजेपी को कई झटके लगे। एक ओर साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा, तो वहीं हालिया विधानसभा उपचुनाव में भी सत्तारूढ़ पार्टी ने सभी 4 सीटों पर अपना कब्जा जमाया।
बता दें बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति का सबसे अहम पहलू हिंदू एकजुटता को माना जाता है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की आबादी करीब 30फीसदी है। बीजेपी को उम्मीद जताई थी कि पार्टी को हिंदू एकजुटता के अलावा मुस्लिम वोटों का भी फायदा मिलेगा, लेकिन मध्य और दक्षिण बंगाल में वोटों का कोई खास विभाजन नहीं हुआ। यहां पर मुसलमानों ने टीएमसी का समर्थन किया। साल 2019 में बीजेपी की राजनीतिक बढ़त को बड़े पैमाने पर मतुआ-नामसुद्र, राजबंशी और जंगलमहल के आदिवासी समूहों जैसे दलित समूहों के समर्थन से मदद मिली थी। वहीं साल 2024 के नतीजे पूरी तरह से बीजेपी के लिए निराशाजनक नहीं रहे। वहीं पश्चिम बंगाल में कभी सत्ता में न आने वाली बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस चुकी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य में बीजेपी की रणनीति सफल होगी।
साल 1977 के चुनावों में जनसंघ ने जनता पार्टी के घटक के रूप में 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। इस तरह से हरिपाड़ा भारती बंगाल इकाई के पहले अध्यक्ष बने। फिर साल 1982 में बीजेपी ने पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा और 0.4फीसदी वोट हासिल किए। 1991 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 291 सीटों पर चुनाव लड़ा। इस दौरान मत 0.51फीसदी से बढ़ाकर 11.34फीसदी तक पहुंचा। साल 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दम पर लोकसभा सीट जीती, जोकि पार्टी की राज्य में पहली जीत थी। फिर साल 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में पार्टी ने खुद को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के मुख्य प्रतिद्वंदी के रूप में खुद को स्थापित किया है।
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