कांग्रेस का तीखा हमला: ‘पीएम मोदी के लिए जातीय जनगणना बना गले की हड्डी, टालने के लिए ढूंढ रहे बहाने’
नई दिल्ली: जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को सरकार पर आरोप लगाया कि घोषणा के एक साल बाद भी प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वपूर्ण सर्वे को अनिश्चितकाल के लिए टालना चाहते हैं।
यू-टर्न की टाइमलाइन: 'नीति नहीं' से लेकर 'अर्बन नक्सल' तक
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया (X) पर प्रधानमंत्री के बयानों में आए बदलावों की एक विस्तृत टाइमलाइन साझा की। उन्होंने याद दिलाया कि 2021 में सरकार ने संसद और सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कहा था कि वह जातिवार गणना नहीं करेगी। रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिस मांग को प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2024 में 'अर्बन नक्सल' की सोच बताया था, उसी पर 30 अप्रैल 2025 को घोषणा करते समय उनकी सोच कैसे बदल गई? उन्होंने इस टिप्पणी के लिए कांग्रेस नेतृत्व से माफी की भी मांग की।
'संवादहीनता और अनिश्चितता' का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि 30 अप्रैल 2025 को हुई आधिकारिक घोषणा के बाद पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन अब तक यह साफ नहीं है कि गणना किस पद्धति से की जाएगी। जयराम रमेश के अनुसार, सरकार ने इस विषय पर न तो विपक्षी दलों से कोई मशविरा किया है और न ही राज्य सरकारों या विशेषज्ञों को विश्वास में लिया है। उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और टालमटोल की राजनीति करार दिया।
खरगे के पत्रों पर 'चुप्पी' और भविष्य की रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखे, जिनमें हालिया पत्र 5 मई 2025 को भेजा गया था। जयराम रमेश ने दावा किया कि इन पत्रों का कोई जवाब न मिलना यह साबित करता है कि सरकार जातीय जनगणना को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद के विशेष सत्र के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि भाजपा सरकार सामाजिक न्याय के इस बड़े कदम से पीछे हटना चाहती है।
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