राज्य में बस टर्मिनलों का कायाकल्प, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से बदलेगी तस्वीर
जयपुर: राजस्थान के बस अड्डों का होगा कायाकल्प, पीपीपी मॉडल पर जिला मुख्यालयों में बनेंगे अत्याधुनिक बस पोर्ट
राजस्थान की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को एक नए और आधुनिक युग में ले जाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य सरकार ने प्रदेश के प्रमुख जिला मुख्यालयों पर सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के जरिए विश्वस्तरीय बस पोर्ट विकसित करने की योजना को हरी झंडी दे दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन बस टर्मिनलों का कायाकल्प न केवल परिवहन व्यवस्था को सुधारेगा, बल्कि राजस्थान को बुनियादी ढांचे के विकास में देश का अग्रणी राज्य भी बनाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम यात्रा के साथ-साथ एक सुखद अनुभव प्रदान करना है, जिससे सरकारी परिवहन के प्रति आम जनता का विश्वास और बढ़ सके।
प्रमुख शहरों में शुरू होगा पुनर्विकास और सुविधाओं का विस्तार
बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारते हुए सरकार ने प्रथम चरण में उदयपुर, बीकानेर, भरतपुर और अलवर जैसे महत्वपूर्ण शहरों का चयन किया है। इसके साथ ही चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, ब्यावर, अजमेर और बूंदी के बस अड्डों को भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बस पोर्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों पर यात्रियों को हवाई अड्डों की तर्ज पर बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ खान-पान की व्यवस्था और व्यवस्थित संचालन की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए एक दीर्घकालिक और समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि इनका प्रबंधन और रखरखाव भविष्य में भी सुचारू रूप से चलता रहे।
निजी और रोडवेज बसों के बीच समन्वय और समयबद्ध संचालन पर जोर
परिवहन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राजस्थान पथ परिवहन निगम (RSRTC) और निजी बस ऑपरेटरों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की रणनीति तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि बसों का नियमित और समयबद्ध संचालन यात्रियों की पहली जरूरत है, जिसके लिए प्रभावी प्रबंधन तंत्र विकसित करना अनिवार्य है। आधुनिक बस पोर्ट विकसित होने से न केवल बसों का ठहराव व्यवस्थित होगा, बल्कि सूचना तंत्र के माध्यम से यात्रियों को अपनी यात्रा के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी। इस नई व्यवस्था के तहत बसों के संचालन में देरी को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए तकनीकी समाधानों का भी उपयोग किया जाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती और रोजगार के नए अवसरों का सृजन
बस पोर्ट परियोजनाओं को केवल परिवहन सुधार तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इन्हें आर्थिक विकास के केंद्रों के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिला मुख्यालयों पर इन आधुनिक केंद्रों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। बस पोर्ट के आसपास व्यापारिक गतिविधियों और सेवाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में यह भी तय किया गया कि परियोजनाओं के निर्माण के दौरान गुणवत्ता और समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि जनता को जल्द से जल्द इन आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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