क्रूज हादसे को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर
जबलपुर: बरगी क्रूज हादसे की जांच तेज; पुलिस ने दर्ज किए 12 बयान, हाई कोर्ट में सभी जल पर्यटन सेवाओं पर रोक की मांग
जबलपुर। बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का शिकंजा कसता जा रहा है। जिला अदालत के सख्त रुख के बाद बरगी थाना पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। पुलिस अब तक एक दर्जन से ज्यादा चश्मदीदों और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है, वहीं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भी इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है।
अदालती आदेश के बाद एक्शन में पुलिस
जबलपुर जिला अदालत की न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बरगी पुलिस को दो दिनों के भीतर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का कड़ा निर्देश दिया था।
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बयानों का सिलसिला: पुलिस ने अब तक हादसे में जीवित बचे पर्यटकों, पर्यटन बोर्ड के रिसोर्ट कर्मचारियों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों सहित 12 से अधिक लोगों से पूछताछ की है।
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समय की मांग: पुलिस ने अदालत से और समय मांगा है, क्योंकि 13 मौतों से जुड़े इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाना और उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट का विश्लेषण करना अनिवार्य है।
क्रूज चालक की लापरवाही आई सामने
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दर्ज किए गए बयानों में यह बात प्रमुखता से उभरी है कि हादसा क्रूज चालक की गंभीर चूक का परिणाम था।
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सुरक्षा में चूक: प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेज आंधी-तूफान के बावजूद क्रूज का संचालन जारी रखा गया।
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लाइफ जैकेट की कमी: यात्रियों को समय रहते लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे बचाव कार्य में देरी हुई और बड़ा हादसा हो गया।
हाई कोर्ट में जनहित याचिका: सेफ्टी ऑडिट की मांग
हादसे की गंभीरता को देखते हुए भोपाल निवासी कमल कुमार राठी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 11 मई को सुनवाई होनी है। याचिका में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं:
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ओवरलोडिंग का आरोप: बताया गया है कि क्रूज में कुल 41 यात्री सवार थे, जबकि टिकट केवल 29 यात्रियों के ही काटे गए थे।
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मौसम की चेतावनी को किया अनसुना: भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 29 अप्रैल को ही खराब मौसम का अलर्ट जारी किया था, इसके बावजूद क्रूज सेवा को बंद नहीं किया गया।
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कठोर मांगें: याचिकाकर्ता ने पूरे प्रदेश में टूरिस्ट बोट और क्रूज सेवाओं पर तत्काल रोक लगाने, सेफ्टी ऑडिट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
यह हादसा न केवल तकनीकी खराबी बल्कि प्रशासनिक अनदेखी का भी बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। 30 अप्रैल 2026 को हुए इस हादसे ने जल पर्यटन की सुरक्षा नीतियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब सबकी निगाहें 11 मई को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई और पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली एफआईआर पर टिकी हैं।
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