ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर भारी, पेट्रोल-डीजल बचाने को सरकार की सख्ती
इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और समझौते की उम्मीदें धूमिल होने के कारण पाकिस्तान में गहराता आर्थिक संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में बनी अनिश्चितता और ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देशव्यापी 'मितव्ययिता अभियान' (Austerity Drive) को अब 13 जून 2026 तक बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
आर्थिक संकट और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर
पाकिस्तान अपनी तेल और ऊर्जा की जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से ही सप्लाई लाइन बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' जैसे विवादित मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इस कूटनीतिक विफलता के कारण पाकिस्तान सरकार को डर है कि आने वाले समय में ईंधन की कमी और भी बढ़ सकती है, जिसके चलते खर्चों में कटौती करना अब मजबूरी बन गया है।
सरकारी खर्चों और ईंधन पर चलेगी कैंची
प्रधानमंत्री द्वारा मंजूर किए गए नए उपायों के तहत सरकार ने संसाधनों को बचाने के लिए कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं:
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ईंधन में कटौती: सरकारी वाहनों के लिए मिलने वाले ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत की भारी कमी कर दी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन की बसों को इस कटौती से बाहर रखा गया है।
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वाहनों पर रोक: लगभग 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को सड़कों से हटाकर बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
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विदेशी दौरों पर पाबंदी: बेहद जरूरी राष्ट्रीय हितों को छोड़कर सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
महंगाई की मार और वैश्विक स्थिति
मितव्ययिता अभियान के बावजूद पाकिस्तान की जनता पर महंगाई का बोझ कम नहीं हुआ है। ईंधन की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण पाकिस्तान पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में दुनिया के सबसे महंगे देशों की सूची में शामिल हो गया है। अप्रैल में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद से ही अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन स्थायी शांति न होने तक पाकिस्तान अपनी "बचत नीति" पर ही कायम रहेगा।
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