Udhayanidhi Stalin के बयान से फिर गरमाई तमिलनाडु की राजनीति
चेन्नई| तमिलनाडु की सत्ता में हुए बड़े बदलाव के बाद एक बार फिर वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। 10 मई 2026 को सी. जोसेफ विजय द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्य में नई सरकार का गठन हो चुका है। इसी बीच, पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की है, जिससे न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
विधानसभा में फिर गूंजा विवादित बयान
द्रमुक (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने नई विधानसभा को संबोधित करते हुए अपने पुराने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा, "जो विचारधारा लोगों के बीच भेदभाव और असमानता पैदा करती है, उसे समाप्त किया जाना चाहिए।" उल्लेखनीय है कि उदयनिधि ने न केवल अपनी इस टिप्पणी से विवाद खड़ा किया, बल्कि हाल ही में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' के गायन पर भी सवाल उठाए थे।
विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले सितंबर 2023 में चेन्नई के एक सम्मेलन में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना 'डेंगू' और 'मलेरिया' जैसी बीमारियों से करते हुए इसे पूरी तरह खत्म करने की वकालत की थी। इस बयान के कारण मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें सख्त फटकार लगाई थी।
भाजपा का तीखा पलटवार
भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर उदयनिधि के इस बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "पिछली बार जब उदयनिधि ने ऐसी बात कही थी, तो अदालतों ने इसे 'हेट स्पीच' माना था और जनता ने उनकी पार्टी को विपक्ष की राह दिखा दी थी। करोड़ों लोगों की आस्था को निशाना बनाना साहस नहीं, बल्कि अहंकार है। इस बार उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।"
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