महंत देवानंद हत्याकांड में बड़ा खुलासा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 26 वार की पुष्टि
कोटा। राजस्थान के चंद्रसेल मठ में जूना अखाड़े के महंत देवानंद महाराज की नृशंस हत्या के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। तीन डॉक्टरों के विशेष पैनल द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कई स्तब्ध करने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महंत के पूरे शरीर पर धारदार हथियार से करीब 26 बार वार किए गए, जिससे उनके शरीर पर गहरे जख्म बन गए थे। सबसे ज्यादा हमले उनकी पीठ पर हुए, जहां चोट के 16 से 17 निशान मिले हैं। इसके अलावा उनके सीने पर भी घातक प्रहार किए गए, जिससे उनका हृदय (हार्ट) पंचर हो गया। अत्यधिक खून बहने और हार्ट डैमेज होने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घावों की स्थिति को देखकर डॉक्टरों का अनुमान है कि वारदात के वक्त महंत या तो सो रहे थे या पेट के बल लेटे हुए थे, जिसके कारण वे बचाव नहीं कर सके। उनके शरीर पर खरोंचों के भी कई निशान मिले हैं, जो उनकी तड़प और बेरहमी को बयां करते हैं।
संघर्ष के मिले साक्ष्य और लूट की थ्योरी खारिज
पोस्टमार्टम के साथ ही पुलिस को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई है। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल पर संघर्ष के स्पष्ट संकेत मिले हैं, जिससे यह साफ होता है कि महंत ने हमलावरों से खुद को बचाने का प्रयास किया था। मौके से मिले सुरागों के आधार पर हमलावरों की संख्या एक से अधिक होने और उनके पास घातक हथियार होने की पुष्टि हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि महंत के कमरे में रखी अलमारी और अन्य कीमती सामान पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं। किसी भी सामान के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है, जिससे पुलिस ने लूट के इरादे से हत्या की आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में माना गया है कि हमलावर केवल हत्या के मकसद से ही मठ में दाखिल हुए थे।
पुजारी और सेवादारों सहित सात संदिग्ध हिरासत में
इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की कमान खुद एडीजी विशाल बंसल संभाल रहे हैं और मामले के खुलासे के लिए पुलिस की सात अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। पुलिस ने संदेह के आधार पर मठ के ही पुजारी नंदनवन और तीन सेवादारों सहित कुल सात लोगों को हिरासत में लिया है। अब तक की कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस की तफ्तीश की सुई मठ के आंतरिक विवादों पर ही टिकी हुई है। जांच में सामने आया है कि पास के कमरे में सुरक्षित मिले पुजारी नंदनवन और मृतक महंत के बीच कुछ दिनों पहले किसी बात को लेकर तीखी तकरार हुई थी। इसके अलावा पुलिस को यह भी पता चला है कि पुजारी नंदनवन स्वयं नशे के आदी थे और कई संदिग्ध लोग अक्सर उनके पास आते-जाते थे।
हत्या के मुख्य कारण की तलाश में जुटी पुलिस
वारदात को करीब 40 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक हत्या के असली कारणों (मोटिव) का पता नहीं लगा सकी है। पुलिस हत्यारों की सटीक पहचान और कत्ल की मुख्य वजह को तलाशने के लिए कई पहलुओं पर काम कर रही है। इस सिलसिले में 38 वर्षीय महंत देवानंद के निजी जीवन को लेकर भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। जांच में सामने आया है कि करीब 15 साल पहले सवाई माधोपुर में उनका विवाह हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद ही उनका पत्नी से अलगाव हो गया था और उनकी कोई संतान नहीं थी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जल्द ही इस हत्याकांड की पूरी कमान खोलते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
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