'सामंथा ने दिखाया दम, लेकिन कहानी पड़ गई फीकी'; जानिए 'मां इंटी बंगारम' पर दर्शकों की राय
हैदराबाद। दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मां इंटी बंगारम' आखिरकार आज शुक्रवार को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो गई है। अपनी रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता जगाने वाली इस फिल्म को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। इंटरनेट पर फिल्म के कई दृश्य और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रहे हैं। हालांकि, सिनेमाघरों में दस्तक देने के बाद इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
सामंथा के दमदार एक्शन और अभिनय की चौतरफा प्रशंसा
प्रसिद्ध निर्देशक बी.वी. नंदिनी रेड्डी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र सामंथा का अभिनय रहा है। पर्दे पर उनका आक्रामक और अनोखा अंदाज देखकर प्रशंसक बेहद रोमांचित हैं। सोशल मीडिया पर आ रहे शुरुआती रुझानों में नेटिजंस उनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं। फिल्म में दिखाए गए उनके हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों को देखकर कई फैंस इंटरनेट पर 'क्वीन इज बैक' (क्वीन लौट आई है) लिखकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। सामंथा ने एक बार फिर साबित किया है कि वे अपने दम पर पूरी फिल्म को खींचने का माद्दा रखती हैं।
मजेदार संवाद और बेहतरीन संगीत, मगर कहानी में नयापन गायब
इस एक्शन-कॉमेडी फिल्म को शुरुआती तौर पर एक मुकम्मल पारिवारिक मनोरंजक सिनेमा बताया जा रहा है, जिसे लोग सपरिवार देखने की सलाह दे रहे हैं। फिल्म में गुलशन देवैया की अदाकारी और संतोष नारायणन के शानदार संगीत की भी काफी सराहना हो रही है। दर्शकों ने इसके चुटीले स्क्रीनप्ले और दमदार संवादों को काफी पसंद किया है, लेकिन फिल्म की मुख्य कहानी को लेकर लोगों की राय थोड़ी ठंडी है। कई दर्शकों का मानना है कि कहानी काफी पुरानी और घिसी-पिटी है, जिसके चलते आगे क्या होने वाला है इसका अंदाजा फिल्म देखने के दौरान बहुत आसानी से लग जाता है।
सहयोगी कलाकारों की छाप और सेकंड हाफ की सुस्त रफ्तार
फिल्म के अन्य महत्वपूर्ण किरदारों की बात करें, तो सहायक भूमिकाओं में श्रीमुखी ने 'अनसूया' और मंजूषा ने 'किरणमयी' के रूप में दर्शकों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। कुछ नेटिजंस ने समीक्षा करते हुए लिखा है कि फिल्म अपने दिलचस्प किरदारों, हास्य और पारिवारिक ड्रामे के बदौलत दर्शकों को बांधने में सफल रहती है, लेकिन किरदारों के फ्लैशबैक यानी 'अतीत' वाले हिस्से में आकर इसकी रफ्तार थोड़ी डगमगा जाती है। इसके साथ ही, मध्यांतर (सेकंड हाफ) के बाद स्क्रीनप्ले थोड़ा खिंचा हुआ और सुस्त महसूस होता है, हालांकि फिल्म का अंतिम क्लाइमेक्स दर्शकों को एक संतोषजनक अनुभव देने में कामयाब रहता है।
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