नए राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया का सादगी भरा अंदाज़, चाय पर जनता से जुड़े
राजसमंद। राजनीतिक गलियारों में अक्सर यह देखा जाता है कि जब किसी राजनेता का ओहदा और कद बढ़ता है, तो उनके इर्द-गिर्द सुरक्षा का तामझाम और प्रोटोकॉल का दायरा भी काफी बड़ा हो जाता है। इसके विपरीत, राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता और हाल ही में निर्वाचित हुए राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया का एक बेहद जुदा और आत्मीय अंदाज देखने को मिला है, जिसने हर किसी को प्रभावित किया है। देश की संसद के उच्च सदन का सदस्य मनोनीत होने के बाद जब पूनिया मेवाड़ के विख्यात धार्मिक स्थल नाथद्वारा पहुंचे, तो वहां उनके एक अनूठे रूप ने सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच जमकर प्रशंसा बटोरी। नए सांसद महोदय अचानक वीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल की दीवारें लांघकर एक ठेठ 'चायवाले' के अंदाज में दिखाई दिए।
सांसद ने तोड़ा प्रोटोकॉल और खुद संभाली चाय की दुकान की कमान
दरअसल, राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया नाथद्वारा स्थित पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के प्रधान पीठ श्रीजी प्रभु (श्रीनाथजी) के दर्शन-पूजन करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं से भेंट करने के लिए आए थे। इसी प्रवास के दौरान रास्ते में उनका काफिला एक साधारण चाय के केबिन (थड़ी) पर रुका। आमतौर पर बड़े जनप्रतिनिधि ऐसी जगहों पर सिर्फ औपचारिकता निभाते हुए कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर चाय पीते हैं, परंतु पूनिया ने यहां अपनी सादगी का परिचय दिया। वे सीधे दुकान के भीतर काउंटर के पीछे पहुंच गए और गैस का बर्नर तेज कर अपने हाथों से पुदीने वाली कड़क चाय का तड़का लगाने लगे। दूध, चीनी, चायपत्ती और पुदीने के उचित तालमेल के साथ जब वे चाय खौलाने लगे, तो वहां खड़े पार्टी कार्यकर्ता और राहगीर अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाए।
अपने हाथों से कुल्हड़ में चाय छानकर समर्थकों को परोसी
सतीश पूनिया का यह जमीन से जुड़ाव केवल चाय बनाने तक ही सीमित नहीं रहा। जब पुदीने की महक वाली कड़क चाय पूरी तरह उबलकर तैयार हो गई, तो उन्होंने खुद ही केतली उठाई और कुल्हड़ों व गिलासों में चाय छानी। इसके बाद उन्होंने किसी बड़े पद के अहंकार से दूर रहकर एक-एक कर वहां मौजूद अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम राहगीरों को सादर चाय का वितरण किया। अपने कद्दावर नेता के हाथों से परोसी गई गरमा-गरम चाय की चुस्कियां लेकर कार्यकर्ता बेहद आनंदित नजर आए। इस पूरे जमीनी वाकये को वहां उपस्थित किसी प्रशंसक ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है।
सांस्कृतिक संस्कार और सादगी से जीता जनता का भरोसा
इस प्रेरक घटनाक्रम के पश्चात सतीश पूनिया ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि पद चाहे कोई भी मिले, वे सदैव स्वयं को एक सामान्य और जमीनी कार्यकर्ता ही मानते हैं तथा आम अवाम के बीच सीधे संवाद में रहना ही उनकी वास्तविक राजनीतिक शक्ति है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूनिया का यह व्यवहार महज कोई संयोग या दिखावा नहीं है, बल्कि यह उनकी सुलभ, सहज और 'डाउन-टू-अर्थ' राजनेता वाली प्रामाणिक छवि को और अधिक प्रगाढ़ करता है। इंटरनेट मीडिया पर भी लोग इस पर तरह-तरह की सकारात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं कि पद भले ही ऊंचा हो जाए, लेकिन विनम्रता और अच्छे संस्कार ही हमेशा जनता के दिलों पर राज करते हैं।
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