इजरायल का सख्त रुख, नेतन्याहू बोले- तीन मोर्चों से सेना हटाने का सवाल नहीं
यरूशलेम: अंतर्राष्ट्रीय दबाव और लगातार जारी सीज़फायर (युद्धविराम) के उल्लंघन के आरोपों के बीच इज़रायल की सेना लेबनान और गाज़ा में अपनी सैन्य कार्रवाई को थामने के मूड में नहीं है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कॉम्बैट ऑफिसर्स के ग्रेजुएशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि इज़रायली सेना लेबनान, गाज़ा और सीरिया से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी और जब तक ज़रूरत होगी, इन तीनों मोर्चों पर मजबूती से तैनात रहेगी।
सिक्योरिटी ज़ोन्स को बताया पीछे न हटने की वजह
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सेना के न हटने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि लेबनान, गाज़ा और सीरिया में सुरक्षा क्षेत्र (Security Zones) या बफर ज़ोन्स बने हुए हैं, जो इज़रायल की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने भी प्रधानमंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए इसे देश के लिए अनिवार्य बताया। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि इज़रायली सेना इन सुरक्षा क्षेत्रों में बिना किसी समय सीमा (Limit) के तैनात रहेगी ताकि देश की जनता को आतंकियों से सुरक्षित रखा जा सके।
सीमावर्ती इलाकों पर लगातार मंडरा रहा है खतरा
इज़रायल के इस आक्रामक रुख की मुख्य वजह उसकी सीमाओं से सटते खतरे हैं। दरअसल, लेबनान में आतंकी संगठन हिज़बुल्लाह और गाज़ा में हमास अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, जबकि सीरिया में ईरान समर्थित कई इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन लगातार सक्रिय हैं। चूंकि इन तीनों क्षेत्रों की सीमाएं इज़रायल से लगती हैं, इसलिए वहां से कभी भी इज़रायल के रिहायशी इलाकों पर बड़ा हमला हो सकता है। इसी संभावित खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए नेतन्याहू के आदेश पर साउथ लेबनान और गाज़ा में ज़मीनी व हवाई हमले जारी हैं, साथ ही सीरिया में भी समय-समय पर एयरस्ट्राइक्स की जा रही हैं। हालांकि, इन हमलों में आतंकियों के सफाए के साथ-साथ बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान जाने पर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है।
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