पहाड़ी से मलबा गिरने से ओंकारेश्वर में अफरा-तफरी, चार दुकानों को भारी नुकसान
ओंकारेश्वर। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के बीच रविवार रात एक भयानक हादसा होने से बाल-बाल टल गया। ब्रह्मपुरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले झूला पुल मार्ग पर स्थित राठौर धर्मशाला के समीप रात करीब 11:20 बजे पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरक गया। इसके चलते भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा मुख्य सड़क पर आ गिरा। इस भूस्खलन की चपेट में आने से मार्ग पर स्थित चार दुकानें पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गईं।
दुकानें हुईं जमींदोज, हजारों का नुकसान
पहाड़ी से गिरे इस भारी मलबे की वजह से स्थानीय दुकानदार रवि केवट, प्रवीण केवट और अरुण केवट सहित एक अन्य व्यवसायी की दुकानें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। अचानक हुए इस भूस्खलन के कारण दुकानों के भीतर रखा हुआ हजारों रुपये का कीमती सामान और ढांचा मलबे के नीचे दब गया, जिससे पीड़ित दुकानदारों को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है।
रात का समय होने से टली बड़ी त्रासदी
इस पूरी घटना का सबसे राहत देने वाला पहलू यह रहा कि हादसा देर रात हुआ। उस समय तक झूला पुल मार्ग की सभी दुकानें बंद हो चुकी थीं और दुकानदार अपने घरों को लौट चुके थे। चूंकि यह मार्ग ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का मुख्य रास्ता है, इसलिए यहां दिन के समय पैर रखने की भी जगह नहीं होती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह लैंडस्लाइड दिन के उजाले या तीर्थयात्रियों की आवाजाही के दौरान हुई होती, तो बड़े पैमाने पर जनहानि होना निश्चित था।
जेसीबी की मदद से मलबा साफ करने का काम शुरू
सोमवार सुबह होते ही नगर परिषद ओंकारेश्वर की रेस्क्यू टीम ने मोर्चा संभाला और जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क पर फैले विशाल पत्थरों और मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कराया। नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) मोनिका पारधी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण पहाड़ी की मिट्टी ढीली हो गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। उन्होंने साफ किया कि मलबे को साफ कर मार्ग को पुनः सुचारू किया जा रहा है।
संवेदनशील इलाकों में अलर्ट, पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी
प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से अब कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सीएमओ मोनिका पारधी के अनुसार, नगर परिषद की टीमें क्षेत्र के सभी संवेदनशील और भूस्खलन संभावित पहाड़ी रास्तों की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं। खतरनाक स्थानों पर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए चेतावनी बोर्ड भी स्थापित किए गए हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है कि वे भारी बारिश के दौरान पहाड़ियों, ढलानों और नदी घाटों के पास अनावश्यक रूप से खड़े न हों और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करें।
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