CMO के नए निर्देश के बाद बदली तबादलों की रणनीति, एक साथ नहीं आएगी पूरी ट्रांसफर लिस्ट
जयपुर। राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण पर से रोक हटे दो सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर महकमों की ट्रांसफर लिस्ट अभी तक सामने नहीं आ पाई हैं। सचिवालय और प्रशासनिक गलियारों में यह बात चर्चा में है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम में व्यस्तता के कारण सरकार ने इन सूचियों को रोके रखा था। अब यह आयोजन पूरा होने के बाद सोमवार से अलग-अलग विभागों की तबादला सूचियां सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, माना जा रहा है कि इस दफा बीते सालों की तरह बहुत बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को नहीं मिलेगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय की कड़ी निगरानी और सीमित ट्रांसफर
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी महकमों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ कहा गया है कि केवल उन्हीं कार्मिकों के तबादले किए जाएं जिन्होंने खुद इसकी इच्छा जताई है या फिर जहां वास्तव में प्रशासनिक तौर पर बदलाव की जरूरत है। बेवजह और बड़े पैमाने पर फेरबदल न करने की हिदायत दी गई है, जिसके चलते इस बार सूचियां सीमित रहने के आसार हैं।
चरणबद्ध तरीके से जारी होंगी सूचियां
इस बार पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया पर सीएमओ की सीधी नजर है। महकमों द्वारा तैयार की गई सूचियां फाइनल अप्रूवल के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जा रही हैं। अफसरों का सोचना है कि एक साथ बड़ी सूची भेजने पर किसी गड़बड़ी या आपत्ति के कारण पूरी लिस्ट होल्ड हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभागों ने छोटी-छोटी सूचियां तैयार की हैं, जिन्हें टुकड़ों में मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। ऐसे में हर विभाग एक साथ बड़ी फेहरिस्त निकालने के बजाय तीन से चार किस्तों में सूचियां जारी कर सकता है।
लंबे समय बाद मिली राहत और जयपुर के लिए मची होड़
प्रदेश में करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद तबादलों से रोक हटाई गई है। पहले इसकी अवधि 19 जून से 5 जुलाई तक तय थी, लेकिन कर्मचारियों और नेताओं के आग्रह पर इसे बढ़ाकर 10 जुलाई 2026 कर दिया गया। इस तरह कुल 22 दिनों तक यह प्रक्रिया चलेगी। इस बीच मंत्रियों और विधायकों के घरों पर मनचाही जगह पोस्टिंग के लिए सिफारिशें कराने वालों का तांता लगा हुआ है, जिससे दफ्तरों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। सबसे ज्यादा होड़ राजधानी जयपुर में नियुक्ति पाने या वहां जमी हुई सीट को बचाने के लिए मची है। दबाव बढ़ता देख मंत्री और अफसर कर्मचारियों को जयपुर के बजाय दूसरे जिलों का विकल्प चुनने की राय दे रहे हैं।
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