राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर नया मोड़, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
जयपुर। राजस्थान की राजधानी में राजस्थान मंदिर ट्रस्ट और धार्मिक न्यास परिषद के कामकाज को लेकर छिड़े एक बड़े विवाद के बीच, न्यास के वरिष्ठ पदाधिकारी और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने एक विशेष साक्षात्कार में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मंदिर के चढ़ावे और गुप्त दानपात्रों (हुंडियों) में हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं के चलते दो वरिष्ठ प्रबंधकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद पहली बार किसी बड़े पदाधिकारी का बयान सामने आया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्य के मुख्य विपक्षी दल के नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने से पहले न्यास को इसकी भनक थी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च प्रबंधन को इस धांधली की जानकारी काफी पहले ही मिल चुकी थी।
चोरी की बात दबाने और मामले को खुद सुलझाने का प्रयास
पदाधिकारी गोविंद देव गिरी ने स्वीकार किया कि धांधली की बात सामने आने पर शुरुआत में इसे बेहद गोपनीय और व्यक्तिगत स्तर पर ही रफा-दफा करने की कोशिश की गई थी। लेकिन जब यह साफ हो गया कि यह घोटाला छोटा-मोटा नहीं बल्कि बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है और इसे अंदरूनी तौर पर नहीं दबाया जा सकता, तब जाकर औपचारिक रूप से विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग उठाई गई। समय पर पुलिस में एफआईआर दर्ज न कराने और ट्रस्ट की ओर से तुरंत कोई सख्त कदम न उठाए जाने के सवाल पर उन्होंने माना कि प्रबंधन इस दुविधा में फंसा रहा कि कार्रवाई की शुरुआत कौन और कैसे करे, और इसी असमंजस तथा लापरवाही के कारण ठोस कदम उठाने में देरी हुई।
निजी स्टाफ पर विश्वासघात और मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप
जब कोषाध्यक्ष से सवाल किया गया कि क्या इस पूरे मामले में किसी रसूखदार व्यक्ति को संरक्षण देने की कोशिश की जा रही थी, तो उन्होंने अपने सहयोगियों का बचाव करते हुए कहा कि उनके किसी भी निष्ठावान साथी की मंशा खराब नहीं थी। उन्होंने दलील दी कि यह पूरी चूक केवल अत्यधिक सीधेपन, दया भाव और गलत लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करने की वजह से हुई। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि आंतरिक जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उसके मुताबिक एक बेहद भरोसेमंद निजी स्टाफ और गाड़ी का चालक ही इस पूरे विश्वासघात और करोड़ों रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी का मुख्य सूत्रधार रहा है।
इस्तीफे के सवाल पर तीखी बहस और साक्षात्कार के बीच हंगामा
साक्षात्कार के अंतिम दौर में जब गोविंद देव गिरी से उनकी खुद की नैतिक जिम्मेदारी और पद छोड़ने को लेकर तीखा सवाल किया गया, तो वे अचानक बेहद असहज और क्रोधित हो गए। उन्होंने तल्ख लहजे में पलटवार करते हुए कहा कि जब दानपात्रों और हुंडियों के चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में उनकी न तो अतीत में कोई भूमिका थी और न ही वर्तमान में कोई सीधा दखल है, तो वे भला किस बात के लिए अपना इस्तीफा दें। इस तीखी बहस के बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप करते हुए जबरन साक्षात्कार को बीच में ही रुकवा दिया और मीडिया का माइक हटाने का प्रयास किया, जिससे मौके पर काफी देर तक हंगामा होता रहा।
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