बारिश का कहर: NCR में बच्चे, इंजीनियर और मजदूरों समेत 9 लोगों की मौत
नई दिल्ली। देश की राजधानी और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मानसून की शुरुआती भारी बारिश ने प्रशासनिक दावों और सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत को पूरी तरह उजागर कर दिया है। जलभराव और जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण पिछले दो दिनों में एक होनहार इंजीनियर सहित दस लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रशासन की इस घोर लापरवाही ने एक बार फिर आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मानसून की पहली ही बारिश ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश ने सरकारी तंत्र के लचर रवैये को सरेआम बेनकाब कर दिया है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण जगह-जगह जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई। प्रशासनिक मुस्तैदी के बड़े-बड़े दावे पहली ही बारिश में पानी-पानी हो गए, जिससे पूरे एनसीआर का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया और व्यवस्था की इस भारी चूक की कीमत बेकसूर नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
दो दिनों के भीतर हादसों में दस मासूम लोगों ने गंवाई जान
सरकारी विभागों की भारी लापरवाही के कारण पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में कुल दस लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। बारिश की शुरुआत होते ही गुरुवार को विभिन्न हादसों में छह लोगों ने दम तोड़ दिया था, जिसके बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुली। इसके अगले ही दिन एक बार फिर लापरवाही का वही दौर देखने को मिला, जिसमें एक इंजीनियर सहित तीन और लोगों की जान चली गई, जबकि एक मासूम बच्चा इस समय जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
बार-बार हो रही त्रासदियों के बाद भी बेअसर रहा सरकारी सिस्टम
हद तो तब हो गई जब पूर्व में हुए हादसों और इंजीनियर युवराज मेहता की असामयिक मृत्यु के बाद भी संबंधित विभागों ने कोई ठोस सबक नहीं लिया। अगर पहली घटना के तुरंत बाद ही खुले नालों को ढकने और बिजली के लटकते तारों को ठीक करने जैसे एहतियाती कदम उठा लिए जाते, तो आने वाले दिनों में होने वाले अन्य बड़े हादसों को आसानी से टाला जा सकता था। प्रशासन की यही संवेदनहीनता और ढीला रवैया लगातार जानलेवा साबित हो रहा है।
नोएडा में जलभराव के बीच करंट की चपेट में आने से बड़ा हादसा
इसी कड़ी में एक बेहद हृदयविदारक घटना नोएडा के सेक्टर-58 ए में सामने आई, जहां ड्यूटी पर जा रहे एक युवा इंजीनियर को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। फैक्ट्री के रास्ते पर भारी जलभराव होने के कारण वे सड़क किनारे बने नाले की स्लैब पर पैदल चल रहे थे, तभी अचानक वे एक बिजली के खंभे से आ रहे करंट की चपेट में आ गए। करंट लगते ही वे संतुलन खो बैठे और पास के ही तीन फीट गहरे पानी से लबालब भरे नाले में गिर गए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
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