न खाएं मिर्च, न करें झगड़ा...पितृ पक्ष में इन चीजों से दूरी में ही भलाई, लेकिन क्यों?
पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पितरों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध का खास समय माना जाता है. इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ और तर्पण करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों घर के माहौल से लेकर खानपान तक में शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए. यही वजह है कि पितृ पक्ष शुरू होते ही कई घरों में कुछ चीजों का सेवन बंद कर दिया जाता है. लोकल 18 से ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान सबसे पहले मांसाहारी भोजन और शराब जैसे नशीले पदार्थों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि श्राद्ध और तर्पण जैसे कर्मों के दौरान मन और शरीर को शांत रखना जरूरी होता है. ऐसे में लोग मांस, मछली, अंडे और शराब का सेवन नहीं करते. कई परिवार पूरे पितृ पक्ष में इन चीजों से दूरी रखते हैं, जबकि कुछ लोग खास तौर पर श्राद्ध वाले दिन इनका सेवन नहीं करते.
प्याज-लहसुन से भी दूरी
पितृ पक्ष में प्याज और लहसुन को लेकर भी कई परिवारों में परहेज किया जाता है. इसकी वजह धार्मिक परंपरा में इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाना बताया जाता है. इस दौरान लोग दाल, चावल, सब्जी, फल, दूध, दही और दूसरे सात्विक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देते हैं. हालांकि, हर परिवार में नियम एक जैसे नहीं होते. कहीं प्याज-लहसुन पूरी तरह बंद रहता है, तो कहीं सिर्फ श्राद्ध के दिन इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता.
बासी खाने से बचते हैं
पितृ पक्ष में ताजे और सादे भोजन को ज्यादा महत्व दिया जाता है. कई घरों में बासी खाना खाने से बचा जाता है और कोशिश रहती है कि भोजन ताजा बनाकर ही खाया जाए. इसी तरह बहुत ज्यादा तेल, मिर्च और मसालों वाली चीजों से भी दूरी रखी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्राद्ध के दिनों में भोजन जितना सादा और सात्विक रखा जाए, उतना बेहतर माना जाता है. इसलिए इस दौरान हल्का और घर का बना खाना खाने का चलन देखने को मिलता है.
नशे से भी दूरी
ज्योतिषी अखिलेश पांडेय कहते हैं कि सिर्फ खानपान ही नहीं, पितृ पक्ष के दौरान अपनी दिनचर्या और व्यवहार को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं. लोग शराब, तंबाकू और दूसरे नशीले पदार्थों से दूरी बनाने की कोशिश करते हैं. घर में शांत माहौल रखने और किसी तरह के विवाद से बचने की सलाह भी दी जाती है. मान्यता है कि पितृ पक्ष आत्मचिंतन और पूर्वजों को याद करने का समय है, इसलिए इन दिनों मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए.
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