भोपाल / नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी)  सेंट्रल जोनल बेंच भोपाल ने भीलवाड़ा में पौधारोपण, गोशाला संचालन, लावारिस पशुओं की समस्या और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश बाबूलाल जाजू के एक्जीक्यूशन आवेदन संख्या 01/2026 पर पारित किया गया।

मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) एवं माननीय ईश्वर सिंह (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने की। याचिकाकर्ता बाबूलाल जाजू की ओर से अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा ने पैरवी की। एनजीटी ने वर्ष 2017 में पारित आदेशों की जिंदल सॉ लिमिटेड और नगर निगम द्वारा पालना नहीं करने को गंभीर माना है। एनजीटी ने जिला कलेक्टर एवं नगर निगम, भीलवाड़ा को निर्देश दिए कि गोशाला को नगर निगम के प्रबंधन में लेने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए तथा इसके लिए आवश्यक अधिसूचना जारी की जाए। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि भीलवाड़ा शहर में खुले घूम रहे लावारिस पशु यातायात अवरोध, सड़क दुर्घटनाओं एवं वायु प्रदूषण का कारण बन रहे हैं। ऐसे पशुओं को गोशाला में भेजकर शहर को आवारा पशु मुक्त करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए।

एनजीटी ने आदेश में यह भी कहा कि जिंदल सॉ लिमिटेड अपनी सीएसआर गतिविधियों के अंतर्गत गोशाला के प्रशासन एवं रख-रखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। साथ ही जिंदल सॉ लिमिटेड को सौंपी गई 400 बीघा भूमि एवं गोशाला परिसर में व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे पशुओं को छाया और चारे की सुविधा मिल सके।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अधिकरण ने नगर निगम की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भीलवाड़ा में क्रय किया गया डिकम्पोज़िशन प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है। यह स्थिति ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के विपरीत है। एनजीटी ने जिला कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि वे संयुक्त रूप से समीक्षा कर इस संयंत्र को शीघ्र चालू करें तथा किए गए प्रयासों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

एनजीटी ने जिला कलेक्टर, जिंदल सॉ लिमिटेड एवं नगर निगम को  नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने एवं छह सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को होगी।