भीलवाड़ा। पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने प्रदेशवासियों से इस होली पर कंडों से होलिका दहन करने तथा हरे-भरे पेड़ों को संरक्षित रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि होली रंग और उल्लास का पर्व है, लेकिन उत्सव के नाम पर पेड़ों की कटाई पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

 

जाजू ने कहा कि राजस्थान प्रदेश में लगातार कम होती पेड़ों की संख्या चिंता का विषय है। जलवायु परिवर्तन, घटती वर्षा और बढ़ते तापमान के बीच यदि हम पेड़ों की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ऐसे में होलिका दहन के लिए लकड़ी के स्थान पर कंडों का उपयोग एक सराहनीय और जिम्मेदार कदम है।

 

उन्होंने बताया कि कंडे पर्यावरण अनुकूल विकल्प हैं। इनमें नमी की मात्रा कम होने से दहन के समय काला धुआं नहीं निकलता और प्रदूषण भी कम होता है। साथ ही, इसकी राख उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोगी साबित होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है।

 

बाबूलाल जाजू ने कहा कि कंडों का उपयोग करने से गौशालाओं को भी आर्थिक संबल मिलता है। यदि समाज बड़े स्तर पर कंडो से होली दहन करे तो गौशालाएं आत्मनिर्भर बनेगी और गौवंश के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

 

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस होली पर संकल्प लें — “हरे पेड़ नहीं काटेंगे, कंडों की होली जलाएंगे और हरित राजस्थान बनाएंगे।”