माण्डलगढ़/ उपखंड में काछोला के निकट 900 वर्ष पुरानी 12 वीं शताब्दी की प्राचीन महत्व की 4 मजिला भिणाय की बावड़ी वर्षों से उपेक्षा के कारण जीर्ण-शीर्ण हो रही है। जिसके संरक्षण हेतु प्रयास कर इस धरोहर स्थल के महत्व को खत्म होने से बचाने के लिए इन्टेक, कन्वीनर बाबूलाल जाजू ने विश्व विरासत दिवस पर जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू से मांग की है। जाजू ने बावड़ी के संरक्षण के लिए 2 बार पूर्व में भी पत्र लिखा है। जाजू ने बताया कि प्राचीन धरोहर स्थल का अस्तित्व बचाये रखने के लिए बावड़ी की साफ सफाई कर आवश्यक मरम्मत कार्य करवाने, मुख्य सड़क मार्गों पर बावड़ी से संबधित साइन बोर्ड लगवाये जाने चाहिए। को कन्वीनर श्याम सुंदर जोशी ने कहा कि यह बावड़ी अ‌द्भुत स्थापत्य कला का उदाहरण है। यह विशाल बावड़ी 114 मजबूत खंभों पर टिकी हुई है और इसके भीतर करीब 400 कमरे बने हुए हैं जो भूलभुलैया की तरह आपस में जुड़े हुए हैं। बावड़ी में प्रवेश के लिए दो बड़े दरवाजे बने हुए हैं। यह बावड़ी मेहराब शैली की उत्तर मध्यकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। बावड़ी पर अरबी भाषा में एक शिलालेख भी लगा हुआ है जो इसके निर्माण काल और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देता है। जाजू ने पत्र के माध्यम से जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू से बावड़ी के जीर्णोद्धार व संरक्षण में सहयोग प्रदान करने की मांग करते हुए कहा कि इस कार्य के लिए इन्टैक भीलवाड़ा भी 2 लाख रुपये की राशि का सहयोग करने हेतु तैयार है।