इजरायल-UAE की कथित गुप्त बैठक पर मचा विवाद, राजनीतिक हलकों में हलचल
यरूशलेम / दुबई: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की आग के बीच इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक बड़ा कूटनीतिक विवाद छिड़ गया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने दावा किया कि युद्ध के चरम दौर में नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच एक 'गुप्त बैठक' हुई थी। इस खबर ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यूएई ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह 'निराधार' और 'बेबुनियाद' करार दिया।
इजरायल का दावा: अल ऐन में हुई रणनीतिक चर्चा
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने 26 मार्च को गुप्त रूप से यूएई के अल ऐन शहर की यात्रा की थी। दावे में कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच ईरान के बढ़ते खतरे और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर घंटों लंबी रणनीतिक चर्चा हुई। इजरायल ने इस कथित बैठक को दोनों देशों के बीच भविष्य के रक्षा सहयोग की एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में प्रचारित किया, जिससे ईरान के खिलाफ एक नया गठबंधन बनने के संकेत मिले।
यूएई का सख्त खंडन: 'पारदर्शिता ही हमारा आधार'
इजरायल के इस सनसनीखेज दावे पर यूएई के विदेश मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया। मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री की किसी भी गुप्त यात्रा या बैठक की बात पूरी तरह झूठ है। यूएई ने स्पष्ट किया कि उसके इजरायल के साथ संबंध 'अब्राहम अकॉर्ड' के तहत पूरी तरह खुले और आधिकारिक हैं और वे किसी भी तरह की गैर-पारदर्शी या गुप्त कूटनीति का हिस्सा नहीं हैं। यूएई ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को भी चेतावनी दी कि जब तक अमीरात की आधिकारिक एजेंसियां कोई पुष्टि न करें, तब तक ऐसे दावों को स्वीकार न किया जाए।
पर्दे के पीछे की हलचल और रक्षा सहयोग के कयास
भले ही यूएई ने बैठक का खंडन किया हो, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इस ओर इशारा कर रही हैं कि ईरान के खतरे को देखते हुए पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग काफी बढ़ा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इजरायली एजेंसी 'मोसाद' के प्रमुख डेडी बरनेआ ने युद्ध के दौरान कई बार गुप्त दौरे किए हैं। सबसे चौंकाने वाला दावा इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने किया, जिन्होंने कहा कि ईरान के हमलों से यूएई की सुरक्षा के लिए इजरायल ने अपना घातक 'आयरन डोम' एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कर्मी वहां तैनात किए थे।
ईरान की चेतावनी और क्षेत्रीय कूटनीति के पेंच
इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि जो भी देश इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करेंगे, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई एक तरफ इजरायल के साथ सुरक्षा सहयोग चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ वह अरब जगत के दबाव और ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने के लिए किसी भी सैन्य गठजोड़ को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बच रहा है। फिलहाल, इस कूटनीतिक 'दावे और खंडन' के खेल ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
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