Vijay Mishra को कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा
भदोही। उत्तर प्रदेश की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और बाहुबली नेता विजय मिश्रा की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भदोही की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) अदालत ने एक बहुचर्चित जमीन और फर्म हड़पने के मामले में शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, कोर्ट ने उनकी बहू रूपा मिश्रा को भी इस साजिश में शामिल होने का दोषी पाते हुए 4 साल की जेल की सजा दी है।
गौरतलब है कि विजय मिश्रा की पत्नी रामलली और बहू रूपा मिश्रा को अपने पूरे राजनीतिक व पारिवारिक इतिहास में पहली बार किसी आपराधिक मामले में अदालत द्वारा सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने गुरुवार को इस मामले की अंतिम बहस सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
एक के बाद एक दो बड़े झटके; पहले मिली थी उम्रकैद
विजय मिश्रा के लिए यह सप्ताह कानूनी तौर पर बेहद भारी साबित हुआ है। इस फैसले से ठीक दो दिन पहले यानी बुधवार को ही प्रयागराज की एक अदालत ने उन्हें एक अन्य मामले में उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी। अब भदोही कोर्ट द्वारा पूरे कुनबे को सजा सुनाए जाने से मिश्रा परिवार का राजनीतिक और सामाजिक रसूख पूरी तरह संकट में घिर गया है।
क्या था पूरा मामला और किसने दर्ज कराई थी एफआईआर?
यह पूरा विवाद एक पारिवारिक संपत्ति और व्यवसाय पर जबरन कब्जे से जुड़ा हुआ है। पूर्व विधायक विजय मिश्रा के सगे रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी ने भदोही के गोपीगंज कोतवाली में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बाहुबली विजय मिश्रा ने साल 2001 से ही उनके भदोही स्थित पैतृक मकान पर अपने रसूख और खौफ के बल पर अवैध कब्जा कर रखा था। इतना ही नहीं, विजय मिश्रा और उनके बेटे ने कृष्णमोहन की माइनिंग फर्म (खनन व्यवसाय) को भी डरा-धमकाकर अपने नियंत्रण में ले लिया था।
चार्जशीट में शामिल हुआ था बहू का नाम
गोपीगंज पुलिस ने मामले की बारीकी से विवेचना करने के बाद साल 2023 में अदालत के समक्ष अपनी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी। पुलिस ने तफ्तीश के दौरान मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर पूर्व विधायक, उनकी पत्नी और बेटे के साथ-साथ बहू रूपा मिश्रा को भी इस वित्तीय और अचल संपत्ति की धोखाधड़ी में सह-आरोपी बनाया था। अदालत ने गवाहों के बयानों और दस्तावेजी साक्ष्यों को सही पाते हुए चारों को सख्त सजा से दंडित किया है।
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