सजा से बचने के लिए कोर्ट से भागे अपराधी, पुलिस अब तक खाली हाथ
जोधपुर में एससी एसटी कोर्ट ने ओसिया के पडासला में बस्ती पर हमला और आगजनी के मामले में 16 दोषियों को 7-7 साल की सजा सुनाई। मजिस्ट्रेट ने चालानी गार्ड को सभी दोषियों को हिरासत में लेने का आदेश दिया, लेकिन जब तक चालानी गार्ड सभी को हिरासत में लेने के लिए पहुंचे तब तक सभी आरोपी कोर्ट से भाग गए। घटना 26 सितंबर की है। कोर्ट रीडर संजय पुरोहित ने उदय मंदिर थाने में मामला भी दर्ज करवाया है। पुलिस ने 6 दिन तक मामला छुपाए रखा। पुलिस ने इस पूरे मामले को मॉर्निंग रिपोर्ट में भी साझा नहीं किया। मामला सामने आने के बाद भी पुलिस अब तक एक भी आरोपी को नहीं पकड़ पाई है।
31 जनवरी 2012 को 150 से 200 लोगों ने पडासला गांव में बस्ती पर हमला कर दिया घरों में आग लगा दी गई। घटना में छह लोग चोटिल हुए। फायरिंग के भी आरोप लगे। परिवादी ने ओसियां थाने में 19 दोषियों पर मुकदमा दर्ज करवाया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद अब तक तीन की मौत हो चुकी है। सभी नामजद दोषियों के खिलाफ जोधपुर में एससी एसटी कोर्ट में सुनवाई चल रही थी और 26 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई और चालानी गार्ड को सभी आरोपियों को हिरासत में लेने का आदेश दिया। जब तक चालानी गार्ड पहुंचे सभी 16 आरोपी कोर्ट से भाग गए।
ये हैं 16 नामजद आरोपी
पडासला गांव निवासी जगदीश राम जाट, हनुमान राम जाट, चेनाराम जाट, जगदीश जाट, ओमाराम जाट, दीपाराम जाट, इमरता राम जाट, अचलाराम जाट, लालाराम जाट, भीकाराम जाट, जसाराम जाट, कुंभाराम जाट, अशोक जाट, पुनाराम जाट, चाडी निवासी मांगीलाल बिश्नोई और खींवकरण सिंह उर्फ खियाराम जाट को सजा सुनाई गई है।
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