जयपुर में शाही शादी की तैयारी, कार्ड बनाने में लगा एक साल
जयपुर|राजस्थान की धरती पर शादियां हमेशा से शाही ठाठ, परंपरा और भावनाओं के संगम की मिसाल रही हैं, लेकिन जयपुर के एक पिता ने अपनी बेटी की विदाई को ऐसा स्वरूप दिया है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गुलाबी नगरी के शिव जौहरी ने अपनी बेटी की शादी के लिए ऐसा विवाह निमंत्रण पत्र तैयार कराया, जो सिर्फ कार्ड नहीं, बल्कि आस्था, कला और पिता के प्रेम का अद्वितीय दस्तावेज बन गया है।जयपुर के पारंपरिक आभूषण कारोबार से जुड़े शिव जौहरी ने बेटी श्रुति जौहरी के विवाह को यादगार बनाने के लिए तीन किलो शुद्ध चांदी से बना भव्य, बॉक्सनुमा शादी कार्ड तैयार कराया। करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना यह निमंत्रण पत्र पूरे एक साल की मेहनत और कल्पना का परिणाम है। राजस्थान की कला, धार्मिक आस्था और पारिवारिक संस्कारों की झलक इस कार्ड के हर कोने में दिखाई देती है।
चांदी में उकेरी गई श्रद्धा
यह शादी कार्ड 3 इंच गहराई का है और पूरी तरह चांदी से निर्मित है। इसमें कुल 65 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। सबसे ऊपर भगवान गणेश विराजमान हैं, जो हर शुभ कार्य की शुरुआत का प्रतीक माने जाते हैं। उनके साथ माता पार्वती, भगवान शिव, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की सजीव आकृतियां इस कार्ड को धार्मिक गरिमा प्रदान करती हैं।राजस्थान की भक्ति परंपरा को ध्यान में रखते हुए तिरुपति बालाजी के दो स्वरूप, उनके द्वारपाल, चंवर और दीप थाल लिए देवियां, शंख-नगाड़े बजाते देवता भी इसमें शामिल किए गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा देव लोक बेटी के मंगलमय जीवन का आशीर्वाद देने उतरा हो।
बेटी की विदाई, लक्ष्मी का सम्मान
शिव जौहरी ने यह चांदी का कार्ड अपनी बेटी के ससुराल पक्ष को सौंपते हुए भावुक संदेश दिया कि वे सिर्फ बेटी को विदा नहीं कर रहे, बल्कि अपनी “लक्ष्मी” सौंप रहे हैं। राजस्थान की पारंपरिक सोच में बेटी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है और इसी भावना को इस निमंत्रण पत्र में साकार किया गया है।कार्ड के मध्य में वधु श्रुति जौहरी और वर हर्ष सोनी के नाम अंकित हैं। उनके चारों ओर हाथियों द्वारा पुष्प वर्षा का दृश्य उकेरा गया है, जो राजस्थानी शाही विवाह परंपरा और शुभता का प्रतीक है। बाहरी परत पर अष्ट लक्ष्मी अपनी सेविकाओं के साथ विराजमान हैं, जबकि पीछे की ओर तिरुपति बालाजी के ऊपर सूर्यदेव की आभा दर्शाई गई है।
कृष्ण लीलाओं से सजी चांदी
इस अनोखे कार्ड में भगवान कृष्ण की जन्म से लेकर बाल अवस्था तक की लीलाओं को भी दर्शाया गया है। दक्षिण भारतीय शैली में कृष्ण का एक मुख और पांच धड़ वाला स्वरूप, उनके चारों ओर आठ गायें और कार्ड के चारों तरफ भगवान विष्णु के दस अवतार उकेरे गए हैं। यह संयोजन उत्तर भारत की भक्ति भावना और दक्षिण भारतीय शिल्प कला का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
बिना कील-पेच के बनी कलाकृति
इस कार्ड की एक और खासियत यह है कि इसे 128 चांदी के अलग-अलग टुकड़ों से तैयार किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इसमें न तो किसी कील का इस्तेमाल हुआ है और न ही किसी पेच का। पूरी संरचना पारंपरिक शिल्प तकनीक से जोड़ी गई है, जो राजस्थान की कारीगरी की गहराई को दर्शाती है।
पिता की भावना, प्रदेश की पहचान
शिव जौहरी बताते हैं कि उन्होंने यह कार्ड खुद एक साल में तैयार किया। उनका कहना है कि वे चाहते थे कि बेटी की शादी में सिर्फ रिश्तेदार ही नहीं, बल्कि सभी देवी-देवता भी आमंत्रित हों, ताकि बेटी और दामाद पर जीवनभर ईश्वर का आशीर्वाद बना रहे।राजस्थान में जहां शादियां परंपरा, भव्यता और भावनाओं का उत्सव होती हैं, वहीं जयपुर के इस पिता ने चांदी में ढालकर यह साबित कर दिया कि बेटी की विदाई सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि एक पिता के जीवन की सबसे भावुक और गौरवपूर्ण घड़ी होती है। यह अनोखा निमंत्रण पत्र अब सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और पिता-बेटी के अटूट प्रेम की मिसाल बन चुका है
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