3.52 लाख पौधों के रोपण से हरित आवरण में हुआ बढ़ोत्तरी
रायपुर : छत्तीसगए मानव निर्मित वन क्षेत्र की स्थापना के लिए तैयार है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिक तंत्र के क्षरण को रोकना, उसे स्थिर करना और उसे उलटना, जलवायु परिवर्तन से लड़ना और बड़े पैमाने पर विलुप्त होने की घटना को टालना है। हरियाली का स्पर्श जोड़ने और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाने की अवधारणा न केवल प्रदूषण को कम करेगी बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को भी पुर्नजीवित करेगी।
एनएमडीसी नगरनार क्षेत्र में विकसित हुआ मानव निर्मित वनएनएमडीसी नगरनार क्षेत्र में विकसित हुआ मानव निर्मित वन
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण विस्तार के उद्देश्य से एनएमडीसी नगरनार क्षेत्र में व्यापक वृक्षारोपण कार्य किया गया है। निगम द्वारा एनएमडीसी नगरनार के साथ अनुबंध के तहत वर्ष 2017 से 2025 के बीच कुल 3 लाख 52 हजार 500 पौधों का रोपण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में एक मानव निर्मित वन का सफल विकास हुआ है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस दीर्घकालिक वृक्षारोपण परियोजना के अंतर्गत स्थानीय जलवायु के अनुकूल छायादार, फलदार एवं अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधों का चयन कर वैज्ञानिक पद्धति से रोपण एवं नियमित संरक्षण किया गया। परियोजना का उद्देश्य औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना, जैव विविधता को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को सुदृढ़ करना है।
गौरतलब है कि वन विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार विकसित मानव निर्मित वन भविष्य में वायु गुणवत्ता सुधार, जल संरक्षण, तापमान संतुलन एवं हरित वातावरण निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल राज्य सरकार की सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण नीति के अनुरूप एक सराहनीय प्रयास है। उक्त कार्य औद्योगिक वृक्षारोपण मण्डल, जगदलपुर के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
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