केरल में राजनीतिक घमासान, RSS कार्यक्रम में VC की उपस्थिति पर विवाद
बंगलूरू । केरल के कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (वीसी) के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर शुरू हुआ सियासी विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मसले पर अब पड़ोसी राज्य कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी एंट्री मार ली है। खरगे ने केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के उस कड़े रुख का पुरजोर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने दोषी कुलपतियों से समाज के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की बात कही है।
कुलपतियों की भूमिका और छात्रों पर गलत असर का हवाला
सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मंत्री प्रियांक खरगे ने विश्वविद्यालयों के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की नैतिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी कुलपति के कंधों पर लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने का जिम्मा होता है; ऐसे में यदि वे किसी खास और कट्टर विचारधारा वाले संगठन के मंच पर दिखाई देंगे, तो इससे नई पीढ़ी के बीच बेहद गलत और भ्रामक संदेश जाएगा। खरगे ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि क्या कुलपतियों का यह आचरण छात्रों को भी उसी विशिष्ट विचारधारा के रास्ते पर चलने के लिए विवश या प्रेरित करने का एक मौन संकेत है।
शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को प्रगतिशील सोच अपनाने की नसीहत
कर्नाटक के मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थाओं के मार्गदर्शकों को केवल उन्हीं मंचों और आयोजनों का हिस्सा बनना चाहिए, जहां विशुद्ध रूप से आधुनिक शिक्षा, ज्ञान के प्रसार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलता हो। उन्होंने सलाह दी कि उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े नीति-निर्धारकों को खुद संकीर्णता से दूर रहकर एक प्रगतिशील और समावेशी सोच का प्रदर्शन करना चाहिए, ताकि वे देश के विद्यार्थियों को भी उसी सकारात्मक और खोजी दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकें।
केरल के मुख्यमंत्री की मांग और भाजपा का पलटवार
इस पूरे घमासान की शुरुआत तब हुई जब केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने संघ के कार्यक्रम में शामिल होने वाले तीन कुलपतियों के आचरण की कड़े शब्दों में निंदा की। सतीशन ने आरोप लगाया कि समाज में कुलपति का ओहदा बेहद गरिमामयी होता है, लेकिन सांप्रदायिक विचारों को बढ़ावा देने वाले संगठन के कार्यक्रम में जाकर उन्होंने इस प्रतिष्ठित पद की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है, जिसके लिए उन्हें जनता से क्षमा मांगनी चाहिए। दूसरी तरफ, केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री के इस बयान पर कड़ा प्रतिवाद दर्ज कराते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी को निशाना नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत के कार्यक्रम में कुलपतियों की उपस्थिति को एक सामान्य सामाजिक सहभागिता करार दिया, जिसके बाद शिक्षा जगत की निष्पक्षता को लेकर बहस और तेज हो गई है।
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