जनता बेहाल, तेल कंपनियों की चांदी: महंगाई ने बजट किया खाली
उदयपुर। राजस्थान में ईंधन के दामों में लगातार हो रहे इजाफे और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों ने आम नागरिकों, किसानों और व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूने के कारण माल ढुलाई (परिवहन लागत) में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की अनिवार्य वस्तुओं जैसे— अनाज, हरी सब्जियां, दूध, फल और भवन निर्माण सामग्री पर पड़ रहा है, जिससे खुदरा बाजार में महंगाई तेजी से पैर पसार रही है।
वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी कीमतें; मालवाहक वाहनों का संचालन हुआ महंगा
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते हाल ही में 15 मई और 19 मई को पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी की गई थी। इस वृद्धि के बाद से ही पूरे प्रदेश में महंगाई का दबाव और ज्यादा गहरा गया है। ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल महंगा होने से ट्रकों और अन्य कमर्शियल वाहनों को चलाना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ; सिंचाई से लेकर फसल ढुलाई तक सब कुछ हुआ महंगा
ईंधन की इस मार का सबसे बड़ा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है। किसानों का दर्द है कि डीजल की कीमतों में लगी आग के कारण ट्रैक्टरों से खेतों की जुताई, पंपसेट के जरिए फसलों की सिंचाई, कृषि उपकरणों का रख-रखाव और तैयार फसलों को मंडियों तक ले जाने का भाड़ा काफी बढ़ गया है। लागत बढ़ने से खेती-किसानी घाटे की तरफ बढ़ रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
ईंधन पर भारी-भरकम वैट; चारों तरफ से प्रभावित हुआ बाजार का गणित
जानकारों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ने से राज्य सरकार के मूल्य संवर्धित कर (वैट) के खजाने में भी इजाफा होता है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पेट्रोल पर लगभग 29.04 प्रतिशत और डीजल पर करीब 17.30 फीसदी वैट वसूला जा रहा है। इस भारी टैक्स और बढ़ती कीमतों के कारण बाजार का पूरा बजट बिगड़ चुका है:
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घरेलू बजट: रसोई गैस और रोजमर्रा के खर्चों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
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छोटे व्यापारी: माल मंगाने की लागत बढ़ने से फुटकर और छोटे दुकानदारों का मुनाफा मार्जिन लगातार घट रहा है।
वाहन की टंकी फुल कराने को लेकर भ्रम दूर; डीलर्स एसोसिएशन ने जारी की तकनीकी सलाह
इधर, शहर के एक पेट्रोल पंप पर वाहन की निर्धारित क्षमता से ज्यादा डीजल भरे जाने के विवाद के बाद उदयपुर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी जागरूकता संदेश जारी किया है। एसोसिएशन के सचिव राजराजेश्वर जैन ने तकनीकी पहलू स्पष्ट करते हुए बताया कि:
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पेट्रोलियम पदार्थ तापमान के उतार-चढ़ाव के अनुसार फैलते और सिकुड़ते हैं।
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सुरक्षा के लिहाज से किसी भी वाहन के फ्यूल टैंक को उसकी कुल क्षमता से 10 से 15 फीसदी खाली रखना अनिवार्य होता है।
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ऑटोमोबाइल कंपनियां सर्विस मैनुअल में जो क्षमता लिखती हैं, वह केवल एक सुरक्षित मानक सलाह होती है, न कि टैंक की आखिरी सीमा। कई बार वाहन चालक टंकी को पूरा ऊपर तक (नली तक) भरने के लिए गाड़ी को हिलाते हैं, जिससे टैंक में निर्धारित क्षमता से अधिक ईंधन समा जाता है और भ्रम की स्थिति बनती है।
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