पंजाब की राजनीति गरमाई, बीजेपी का नया मास्टर प्लान सामने
चंडीगढ़ | पंजाब विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य का सियासी पारा अचानक गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ी रणनीतिक घेराबंदी करते हुए सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका दिया है। भगवा दल ने अपने कूटनीतिक कौशल का परिचय देते हुए 'आप' के सात राज्यसभा सांसदों को अपने पाले में कर लिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा की यह रणनीति नई नहीं है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी भाजपा ने इसी तर्ज पर चलते हुए तत्कालीन सत्ताधारी दल कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई दिग्गज चेहरों को अपने साथ जोड़ा था। उस समय भाजपा के निशाने पर कांग्रेस थी, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी बिसात मौजूदा सरकार के खिलाफ बिछाई है, जो सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी की जड़ों को हिलाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है।
सिद्धांतों से भटकाव का आरोप लगाकर राज्यसभा सांसदों ने थामा भाजपा का दामन
आम आदमी पार्टी के लिए बीते 24 अप्रैल का दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जब पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात ने एक साथ बगावत का बिगुल फूंक दिया। राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे कद्दावर नेताओं ने पार्टी के बुनियादी मूल्यों और नैतिकता के पतन का हवाला देते हुए प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। पार्टी छोड़ने वाले इन सात सांसदों में से छह पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिससे आगामी चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को गहरी चोट पहुंची है। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी अब अपने उन मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है जिनके दम पर उसने सत्ता हासिल की थी, और इसी वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने भाजपा के नेतृत्व में विश्वास जताने का फैसला किया है।
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