Uddhav Thackeray गुट में राहत, दो सांसदों ने बदली अटकलें
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर सांसदों की संभावित बगावत को लेकर चल रहा 'ऑपरेशन टाइगर' अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। जहां एक तरफ 9 में से 6 लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जाने की जोरदार अफवाहें थीं, वहीं अब उद्धव ठाकरे गुट के दो प्रमुख सांसदों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर गेम पलट दिया है। नासिक से लोकसभा सांसद राजाभाऊ वाजे और मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से लोकसभा सांसद संजय दीना पाटिल ने शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों पर विराम लगा दिया है।
उद्धव गुट के दो सांसदों का बागी होने से साफ इनकार
पार्टी में टूट की खबरों के बीच नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे ने दिल्ली पहुंचकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, "मैं पूरी तरह से उद्धव जी के साथ हूं और हमेशा उनके साथ ही रहूंगा। मेरा किसी भी अन्य दल या गुट के नेता से कोई संपर्क नहीं हुआ है। मुझे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कोई फोन कॉल नहीं आया है और न ही उन्होंने मुझसे संपर्क साधने की कोशिश की है। मैं पार्टी से जरा भी नाराज नहीं हूं और दिल्ली में केवल संसदीय समिति की बैठक में हिस्सा लेने आया हूं।"
ठीक इसी तरह, मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से सांसद संजय दीना पाटिल ने भी पाला बदलने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनका शिंदे गुट से कोई लेना-देना नहीं है और वे पूरी तरह उद्धव ठाकरे के प्रति वफादार हैं।
क्यों फेल होता दिख रहा है 'ऑपरेशन टाइगर'?
दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत लोकसभा में कानूनी अयोग्यता से बचने और अलग समूह के रूप में मान्यता पाने के लिए बागी धड़े को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 6 सांसदों का एक साथ टूटना जरूरी था। लेकिन राजाभाऊ वाजे और संजय दीना पाटिल के इस इनकार के बाद बागियों के लिए यह जादुई आंकड़ा जुटाना बेहद मुश्किल हो गया है। इस नए घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे दलबदल के खेल को पूरी तरह उलझा दिया है।
बचाव में उतरी शिवसेना (यूबीटी), कल दिल्ली में बुलाई आपात बैठक
अपनी संसदीय ताकत को बिखरने से बचाने के लिए उद्धव ठाकरे ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के सभी लोकसभा सांसदों को कल यानी गुरुवार, 18 जून को सुबह 11 बजे दिल्ली स्थित संसदीय दल के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक के लिए तलब किया गया है। पार्टी ने सभी सांसदों को इस बैठक में उपस्थित रहने के लिए कड़ा व्हिप भी जारी किया है, ताकि एकजुटता का संदेश दिया जा सके और किसी भी तरह की संभावित सेंधमारी को समय रहते रोका जा सके।
डील के दावों पर घमासान: इस पूरे विवाद के बीच राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सत्ताधारी गठबंधन पर तीखा हमला जारी रखा है। उन्होंने दावा किया कि बाजार में हर सांसद की खरीद-फरोख्त के लिए 50 करोड़ रुपये की कुल कीमत तय की गई है, जिसमें से 15 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर देने का ऑफर चल रहा है। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि इन बागी नेताओं की व्यक्तिगत हैसियत तो 50,000 रुपये की भी नहीं है, इन्हें जो इतनी बड़ी रकम के ऑफर मिल रहे हैं, वह सिर्फ 'शिवसेना' और 'टीएमसी' के ब्रांड टैग की वजह से ही हैं।
अखिलेश यादव का संसद में बड़ा बयान, बोले- 'सरकार के साथ कोई डील तो नहीं हो गई?'
जजों की रिटायरमेंट उम्र पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान मामले में बड़ा फैसला
जिम्बाब्वे दौरा टीम इंडिया के लिए क्यों है खास? श्रेयस अय्यर की कप्तानी से नए चेहरों तक सब पर नजर
खाटू श्यामजी को लेकर कथावाचक की टिप्पणी पर बवाल, विरोध के बाद मांगी माफी
15 साल पूरे होने पर 'सिंघम' को याद करना पड़ा भारी, अजय देवगन ट्रोलर्स के निशाने पर
शराब पीकर ड्राइविंग करना पड़ा भारी, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई स्टार वॉर्नर ने कोर्ट में कबूला जुर्म
दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रभावित, 16 स्टेशन अगले आदेश तक रहेंगे बंद
आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान, बड़ी आबादी गरीबी के शिकंजे में