उपचुनाव से पहले बीजेपी को झटका, अभिषेक बंटी ने नामांकन लिया वापस
पटना| बिहार की राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के पूरे समीकरण को पूरी तरह से उलट-पलट कर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर होने वाले चुनावी संग्राम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। भाजपा की ओर से घोषित किए गए आधिकारिक उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी ने अचानक चुनावी दंगल से पीछे हटने का एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया है। राजनीतिक सरगर्मियों के बीच उन्होंने न केवल चुनाव न लड़ने की घोषणा की, बल्कि आधिकारिक तौर पर अपना नामांकन पत्र (नॉमिनेशन) भी वापस ले लिया है। उनके इस कदम के बाद से ही बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान में पूरी तरह से खलबली मच गई है और सभी राजनीतिक दलों की रणनीतियाँ धरी की धरी रह गई हैं।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर दी जानकारी, पारिवारिक वजहों का दिया हवाला
अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी ने अपने इस अचानक और बड़े फैसले से हर किसी को हैरान कर दिया है। अपने इस कदम के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बेहद गंभीर पारिवारिक और व्यक्तिगत मजबूरियों का हवाला दिया है। इस संबंध में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल को एक औपचारिक और विस्तृत पत्र लिखकर अपने निर्णय की लिखित जानकारी सौंप दी है। पत्र में उन्होंने साफ किया है कि कुछ ऐसे अपरिहार्य पारिवारिक हालात बन गए हैं, जिनके कारण वे इस समय चुनाव प्रचार और सांगठनिक जिम्मेदारियों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। यही वजह है कि वे स्वेच्छा से इस चुनावी दौड़ से खुद को पूरी तरह अलग कर रहे हैं। भाजपा आलाकमान के लिए ऐन चुनाव के वक्त अपने घोषित प्रत्याशी का मैदान छोड़ना एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर उभरा है।
बांकीपुर उपचुनाव का मुकाबला हुआ बेहद दिलचस्प, राजनीतिक पंडितों के गणित बिगड़े
अभिषेक बंटी के इस आत्मसमर्पण और नाम वापसी के फैसले के बाद बांकीपुर का चुनावी रणक्षेत्र अब पूरी तरह से एक नए और बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर पहले से ही कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी, लेकिन भाजपा उम्मीदवार के हटने से अब मुख्य मुकाबला पूरी तरह से त्रिकोणीय या आमने-सामने का हो सकता है। राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों का मानना है कि इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल भाजपा के वोट बैंक के सामने संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी अपनी रणनीतियों में रातों-रात बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भाजपा इस संकट की घड़ी में किस नए चेहरे पर दांव लगाती है या फिर इस सीट पर कूटनीतिक रूप से क्या नया समीकरण तैयार होता है।
राशिफल 22 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
किसान अब उन्नत तकनीक की ओर अग्रसर, पैडी ट्रांसप्लांटर विधि से धान रोपाई
मध्यप्रदेश पुलिस का नशे के विरुद्ध सख्त प्रहार
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी गारंटी : खाद्य मंत्री राजपूत
अपनी मेहनत और समर्पण से बड़वानी बन रहा देश में कृषि, उद्यमिता एवं नवाचार का उदाहरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
निर्वाचन तैयारियां एवं स्वीप गतिविधियां तेज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीस कम्पनी के पदाधिकारी
निर्माणाधीन सुरंग हादसे से मचा हड़कंप, 10 मजदूरों की गई जान
कांग्रेस के प्रदर्शन पर पुलिस का एक्शन, राहुल-अखिलेश समेत कई नेता हिरासत में