भारत के दुश्मनों को कहीं सुरक्षित पनाह नहीं
चेन्नई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को दिखाया कि अगर भारत की संप्रभुता पर हमला हुआ, तो वह किस तरह जवाब देगा और सीमा पार सैन्य कार्रवाई ने पूरे देश में एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां चोल सम्राट राजेंद्र चोल के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह भी साबित कर दिया कि भारत को निशाना बनाने वाले दुश्मनों और आतंकवादियों के लिए कोई जगह सुरक्षित नहीं है। प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में कहा कि दुनिया ने देखा कि अगर कोई भारत की सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला करता है, तो वह कैसे जवाब देता है।’ उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत के दुश्मनों, आतंकवादियों के लिए कोई पनाहगाह नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पूरे देश में एक नई जागृति, एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है।
दुनिया को भारत की ताकत का एहसास होना चाहिए। मोदी ने कहा कि सम्राट राजराज चोल और उनके पुत्र राजेंद्र चोल-प्रथम के नाम भारत की पहचान और गौरव के पर्याय हैं । उन्होंने घोषणा की कि तमिलनाडु में उनकी भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी और ये प्रतिमाएं हमारे ऐतिहासिक जागरण के आधुनिक स्तंभ होंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए कई लोग ब्रिटेन के मैग्नाकार्टा का जिक्र करते हैं, जबकि चोल कालीन ‘कुडवोलाई प्रणाली’ उससे भी पुरानी है।
ओम नम: शिवाय सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं
चेन्नई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में महान चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब वह ‘ओम नम: शिवाय’ सुनते हैं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि एक प्रकार से ये राज राजा की श्रद्धा भूमि है और आज इलैयाराजा ने जिस प्रकार हम सभी को शिवभक्ति में डुबो दिया, क्या अद्भुत वातावरण था। मैं काशी का सांसद हूं, जब मैं ओम नम: शिवाय सुनता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।’ पीएम मोदी ने रविवार को चोलकालीन भगवान बृहदेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। वैदिक और शैव तिरुमुराई मंत्रोच्चार के बीच उन्हें आराधना करते देखा गया। वह पारंपरिक रूप से सजा हुआ एक कलश साथ लाए, जिसके बारे में बताया जा रहा है है कि उसमें गंगा नदी का जल है। मंदिर के पुजारियों ने पारंपरिक तरीके से पूर्ण कुंभम के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
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