यूपी में शिक्षा का संकट: 872 छात्रों पर सिर्फ 2 शिक्षक
लखनऊ|उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा में बड़ा उलटफेर और विरोधाभास नजर आ रहा है। इसकी बानगी श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज महाविद्यालय राजकीय पलिया कला, लखीमपुर खीरी में देखने को मिली। एक तरफ जहां रायबरेली और सीतापुर के राजकीय कॉलेजों में छात्रों का टोटा है। वहीं, इस कॉलेज में 872 छात्र हैं लेकिन शिक्षक मात्र दो ही हैं। शिक्षक न होने से छात्रों की संख्या साल दर साल घट रही है।प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में एक और नेपाल सीमा के नजदीक लखीमपुर में 2001 में राजकीय महाविद्यालय, पलिया कला शुरू किया गया। जिले का एकमात्र कॉलेज होने का फायदा भी मिला। हर साल यहां काफी संख्या में छात्र आने लगे। कॉलेज कुछ वर्षों से विभाग की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। हालत यह है कि यहां इस समय बीए और बीकॉम में कुल 872 छात्र-छात्राएं हैं।
कॉलेज में दो शिक्षक हैं जबकि जरूरत कम से कम आधा दर्जन से ज्यादा शिक्षकों की है। डॉ. सूर्य प्रकाश शुक्ला प्राचार्य का दायित्व निभाने के साथ ही अपना विषय संस्कृत पढ़ाते हैं। छात्रों को हिंदी के बारे में भी जानकारी देते हैं। कभी कभी भूगोल और समाजशास्त्र की सामान्य जानकारी भी देते हैं।
बीकॉम में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वसीम खान अपने विषय से संबंधित छात्रों को पढ़ाते हैं। बाकी छात्र कोचिंग या खुद मेहनत कर कोर्स पूरा करते हैं। दोनों शिक्षक जैसे-तैसे छात्रों को मैनेज करते हैं। हालांकि शिक्षकों की कमी का असर कॉलेज पर पड़ना शुरू हो गया है। कॉलेज में नामांकन तो 872 छात्रों का है लेकिन उपस्थिति 250 से 300 तक सिमट गई है। प्राचार्य कहते हैं कि वह संस्कृत विषय पढ़ाते हैं तो कई विषयों के बारे में छात्रों को अपेक्षित जानकारी नहीं दे पाते हैं। शायद यही वजह है कि सभी छात्र नियमित नहीं आते हैं। अमूमन हर दिन 250-300 छात्र ही आते हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर दूसरे कॉलेजों के शिक्षकों को बुलाकर विशेषज्ञ व्याख्यान कराते हैं।
4000 से घटकर 872 पर पहुंचे
डॉ. शुक्ला ने बताया कि यह कॉलेज का 25वां साल है। साल 2020-21 से वे यहां प्राचार्य हैं। पहले चार-पांच शिक्षक थे। कुछ शिक्षक तबादला लेकर चले गए। दो शिक्षक आए थे। उन्होंने पिछले साल अपना तबादला फतेहपुर के बिंदिकी और वाराणसी के चंदौली में करा लिया। जब मैं आया था तो यहां करीब 4000 छात्र थे जो अब 872 रह गए हैं शिक्षक भी घटकर दो रह गए।
स्मार्ट क्लास और वाई-फाई भी
महाविद्यालय में 14 क्लास रूम, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लास है। वाटर कूलर और वाई-फाई भी है। यहां आने वाली मुख्य सड़क खस्ताहाल है। कॉलेज पलिया नगर सीमा के बाहर ग्रामीण इलाके में पड़ता है। इसके कारण शिक्षक रुकने से कतराते हैं।प्राचार्य डॉ. सूर्य प्रकाश शुक्ला का कहना है कि कॉलेज थोड़ा पिछड़े इलाके में होने से शिक्षक नियमित नहीं रुक रहे। शिक्षकों की तैनाती के लिए उच्च शिक्षा निदेशक व विभागीय अधिकारियों को लिखा है। अगर शिक्षक नियमित रहें तो छात्र बढ़ सकते हैं।बीए प्रथम वर्ष के छात्र अमन कुमार का कहना है कि शिक्षकों की कमी से दिक्कत हो रही है। कई विषयों की जानकारी नहीं मिल पाती है। पत्राचार जैसी पढ़ाई हो रही है। पेशेवर शिक्षक भी नहीं मिलते कि हम ट्यूशन ही पढ़ सकें।उच्च शिक्षा निदेशक बीएल शर्मा का कहना है कि यहां शिक्षकों की कमी की जानकारी मिली है। इसी सप्ताह यहां और शिक्षकों को संबद्ध करेंगे। जिन कॉलेजों में छात्र ज्यादा हैं और शिक्षक कम हैं, वहां पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
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