उरला फैक्ट्री हादसा: धमाके के बाद बचाव कार्य तेज, तीन मजदूरों की मौत
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र (इंडस्ट्रियल एरिया) में मंगलवार की ढलती शाम एक बेहद दर्दनाक और भयानक औद्योगिक हादसा हो गया। यहाँ स्थित एक निजी री-रोलिंग फैक्ट्री के भीतर अचानक हुए एक अत्यंत शक्तिशाली और भीषण विस्फोट (ब्लास्ट) से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। धमाका इतना भयावह और तेज था कि उसकी गूंज से आसपास की धरती हिल गई और कई किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज साफ सुनी गई। प्रारंभिक आधिकारिक और चश्मदीदों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हृदयविदारक हादसे में अब तक तीन स्थानीय श्रमिकों की जान जा चुकी है, जबकि आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए हैं। वहीं, फैक्ट्री की इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढहने के कारण मलबे के नीचे कुछ और मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है।
धमाके की सूचना पर पुलिस, SDRF और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर तैनात; युद्धस्तर पर रेस्क्यू
फैक्ट्री परिसर में हुए इस हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट की सूचना जैसे ही स्थानीय पुलिस प्रशासन को मिली, नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) के माध्यम से तुरंत रिस्पॉन्स टीमें रवाना की गईं। मौके पर उरला थाना पुलिस के साथ-साथ राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के प्रशिक्षित कमांडो और दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की आधा दर्जन गाड़ियां मुस्तैद कर दी गईं। बचाव दल के जवानों ने गैस कटर और आधुनिक उपकरणों की मदद से फैक्ट्री के टूटे हुए लोहे के भारी-भरकम पिलर्स और कंक्रीट के मलबे को हटाकर भीतर फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। देर रात और आज सुबह तक यह रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार युद्धस्तर पर जारी रहा। हालांकि, प्रशासन और डॉक्टरों की ओर से हताहतों और घायलों की अंतिम व सटीक संख्या को लेकर अभी भी पूरी तरह से आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन का इंतजार किया जा रहा है।
रूटीन शिफ्ट के दौरान अचानक फटा ब्लोअर, दहल उठी औद्योगिक नगरी
औद्योगिक सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह भीषण हादसा हुआ, तब फैक्ट्री में रोजाना की तरह जनरल और नाइट शिफ्ट का नियमित काम चल रहा था। प्लांट के भीतर भारी मशीनें चालू थीं और कई मजदूर अपनी-अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात थे। इसी दौरान अचानक तकनीकी खराबी या अत्यधिक दबाव के कारण भट्टी से जुड़े एक हिस्से में जोरदार धमाका हुआ, जिसने पल भर में फैक्ट्री की छत और दीवारों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। विस्फोट की संवेदनशीलता और तीव्रता इतनी अधिक थी कि उरला क्षेत्र की अन्य फैक्ट्रियों में काम कर रहे कर्मचारी भी डर के मारे अपने परिसरों से बाहर खुले मैदान की तरफ भागने लगे।
3 मजदूरों की थम गईं सांसें; मृतकों की हुई पहचान, परिवारों में कोहराम
इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के संबंध में बेहद दुखद विवरण सामने आए हैं। प्रारंभिक पुलिस जांच के मुताबिक, दो मजदूरों ने फैक्ट्री के भीतर ही दम तोड़ दिया था, क्योंकि वे सीधे तौर पर ब्लास्ट के रेडियस (दायरे) में मौजूद थे। वहीं, एक अन्य गंभीर रूप से घायल श्रमिक को जब एम्बुलेंस के जरिए आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब उसने रास्ते में ही अपनी अंतिम सांसें लीं। पुलिस ने पंचनामा कर तीनों शवों को अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए सुरक्षित रखवा दिया है। मृतकों की शिनाख्त कर ली गई है, जिनमें:
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लाल सिंह (निवासी- डिंडौरी, मध्य प्रदेश)
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कमल सिंह (निवासी- डिंडौरी, मध्य प्रदेश)
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अरुण पांडे (निवासी- जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़) शामिल हैं।
हादसे की खबर जैसे ही मृतकों के गृह ग्राम और परिजनों तक पहुंची है, उनके घरों में चीख-पुकार मच गई है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
जेसीबी की मदद से मलबा हटाने का काम जारी; लापता कर्मचारियों की तलाश
बचाव और राहत कार्य में जुटी सरकारी एजेंसियों को अंदेशा है कि ढह चुकी भारी कंक्रीट की दीवारों और लोहे की चादरों के नीचे अभी भी कुछ और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी दबे हो सकते हैं। इसी वजह से मौके पर लगातार तीन से चार बड़ी जेसीबी (JCB) और हाइड्रा क्रेन मशीनों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाने का काम किया जा रहा है। हादसे के वक्त प्लांट के भीतर वास्तव में कितने लोग पंचिंग मशीन पर हाजिर थे, इसकी सटीक संख्या और मस्टर रोल का डेटा फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा अभी तक पुलिस को मुहैया नहीं कराया गया है, जिसे लेकर स्थानीय श्रमिकों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
फैक्ट्री में रखा था ऑक्सीजन सिलेंडरों का जखीरा; बाल-बाल बची बड़ी जनहानि
वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और प्लांट के सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि जिस जगह पर यह भीषण विस्फोट हुआ, उससे महज कुछ ही दूरी पर औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले अत्यधिक ज्वलनशील और भारी ऑक्सीजन सिलेंडरों का एक बहुत बड़ा जखीरा रखा हुआ था। राहत और ईश्वर की कृपा की बात यह रही कि विस्फोट की आग इन सिलेंडरों तक नहीं पहुंची और वे इस विनाशकारी ब्लास्ट की चपेट में आने से पूरी तरह बच गए। औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सिलेंडरों के उस जखीरे में चेन-रिएक्शन के तहत ब्लास्ट हो जाता, तो यह तबाही कई गुना और भयानक हो सकती थी और आसपास की अन्य फैक्ट्रियां भी इसकी जद में आ जातीं। फिलहाल, जिला कलेक्टर के निर्देश पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (डीआईएचएस) और स्थानीय पुलिस की फॉरेंसिक टीम ब्लास्ट के वास्तविक तकनीकी कारणों की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या यह हादसा फैक्ट्री प्रबंधन की किसी बड़ी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते हुआ है।
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