भोपाल/ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच (भोपाल) ने ऐतिहासिक कोटा चिड़ियाघर की भूमि पर प्रस्तावित "स्पोर्ट्स सिटी" बनाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। एनजीटी ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत उचित मंजूरी के बिना वहां कोई भी निर्माण कार्य या पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी । पीठ ने जोर देकर कहा कि विकास के लक्ष्यों को पर्यावरण की अपूरणीय क्षति की कीमत पर हासिल नहीं किया जा सकता । 

 पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने अधिवक्ता लोकेंद्र सिंह कच्छावा के मार्फत याचिका दायर कर कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा  स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने के लिए चिड़ियाघर की 2.2 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण की योजना को चुनौती दी थी । जाजू ने बताया कि वर्ष 1905 में स्थापित यह चिड़ियाघर कोटा के लिए एक जीवनरक्षक "ऑक्सीजन चैंबर" के रूप में काम करता है । निरीक्षण समिति के अनुसार, यह क्षेत्र हॉर्नबिल और बुलबुल सहित 40 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों , कल्पवृक्ष और बटुक आमला जैसे दुर्लभ पेड़ों , तथा मगरमच्छ, घड़ियाल और अजगर जैसे शेड्यूल-1 के संरक्षित वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है । 

 

"सतत विकास' और 'सार्वजनिक ट्रस्ट के सिद्धांत' का हवाला देते हुए एनजीटी ने कहा कि जंगल और हवा जैसी प्राकृतिक संपदा पर सरकार का मालिकाना हक नहीं होता, बल्कि वह जनता की ओर से इसकी रक्षक होती है । याचिका को स्वीकार करते हुए एनजीटी ने चिड़ियाघर की भूमि से किसी भी पेड़ को काटने या पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उचित अनुमति के बिना वन भूमि का डायवर्जन नहीं करने एवं राज्य सरकार और कोटा विकास प्राधिकरण को इस शहरी वन को नष्ट करने के बजाय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए किसी बंजर या वैकल्पिक भूमि का चयन करने का निर्देश दिया गया है । 

जाजू ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे तेजी से बढ़ते शहरों के बीच खत्म हो रही हरियाली को बचाने के लिए एक ऐतिहासिक नजीर बताया।